सक्ती :- 31 अगस्त 2026। किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने और उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सक्ती जिला प्रशासन ने खाद की कालाबाजारी और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन के निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा की गई जांच और कार्रवाई के बाद जिले के 7 खाद विक्रेताओं एवं फर्मों पर कुल 80 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। संबंधित विक्रेताओं द्वारा अर्थदंड की राशि चालान के माध्यम से शासकीय खजाने में जमा कर दी गई है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) 1955 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने के बाद संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई। विभागीय निरीक्षण टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद विक्रेताओं एवं प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण कर स्टॉक, बिक्री व्यवस्था और निर्धारित नियमों के पालन की जांच की थी।
जांच में मिलीं स्टॉक में विसंगतियां
निरीक्षण के दौरान 7 दुकानों एवं फर्मों में खाद के स्टॉक में विसंगतियां, बिक्री संबंधी नियमों की अनदेखी तथा FCO 1985 के निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया गया। जांच में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए गए और चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
मामलों की सुनवाई के बाद कलेक्टर कोर्ट द्वारा संबंधित विक्रेताओं पर अर्थदंड आरोपित किया गया, जिसे अब संबंधित फर्मों एवं विक्रेताओं ने जमा कर दिया है।
इन 7 विक्रेताओं पर हुई कार्रवाई
अर्थदंड जमा करने वाले खाद विक्रेताओं एवं फर्मों में—
कोमल प्रसाद जायसवाल, साराडीह
योगेश कुमार अग्रवाल, फगुरम
कमल खाद भंडार, नन्दौरकला
मयंक ट्रेडर्स, सकरेली बा.
सूर्य ट्रेडर्स, जैजैपुर
सक्ती आधुनिक एफ.पी.ओ., भातमाहुल
अजय बहादुर सिंह राठौर, नन्दौरकला
शामिल हैं। इन सभी पर कार्रवाई के बाद कुल 80,000 रुपये का अर्थदंड शासकीय खजाने में जमा कराया गया है।
खाद की कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर प्रशासन की नजर
जिला प्रशासन ने खाद विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही, कालाबाजारी या ओवररेटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी उर्वरक विक्रेताओं को अपनी दुकानों एवं प्रतिष्ठानों पर स्टॉक बोर्ड और निर्धारित रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान खाद की उपलब्धता और कीमत की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि किसी विक्रेता द्वारा खाद की कालाबाजारी, अधिक कीमत पर बिक्री, स्टॉक में गड़बड़ी या निर्धारित नियमों की अनदेखी की जाती है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने सहित कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने जांच तेज
कृषि विभाग द्वारा केवल उर्वरक बिक्री व्यवस्था की निगरानी ही नहीं, बल्कि खाद, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की भी लगातार जांच की जा रही है। जिले में अब तक उर्वरकों के 143 नमूने, बीज के 197 नमूने तथा कीटनाशकों के 21 नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।
इन नमूनों की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को निर्धारित गुणवत्ता के उर्वरक, प्रमाणित बीज और प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध हों। कृषि विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और कृषि आदानों की बिक्री में अनियमितता करने वालों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जिला प्रशासन ने किसानों से भी अपील की है कि खाद खरीदते समय निर्धारित दर की जानकारी लें, बिल प्राप्त करें और यदि किसी विक्रेता द्वारा अधिक कीमत वसूलने, खाद की कालाबाजारी करने या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जाती है तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें।

