रायगढ़ / धरमजयगढ़ :-आदिवासी अंचल की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बुधवार (06 अगस्त) को विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) एस.आर. सिदार के अचानक निरीक्षण ने सरकारी स्कूलों की पोल खोल दी। कई स्कूलों में शिक्षक तो थे नहीं, और जहाँ थे भी – वहाँ बच्चों को पढ़ाने के बजाय दस्तखत कर भागने की होड़ मची थी।
खड़गांव : “स्कूल चलें हम”, पर शिक्षक कहाँ हैं?
सुबह 10 बजे की बात है, खड़गांव स्कूल में बच्चों की प्रार्थना सभा तो हो रही थी, लेकिन दो शिक्षक और एक भृत्य मौके से नदारद मिले। BEO ने तुरंत तीनों को शोकॉज नोटिस थमा दिया, मगर बड़ा सवाल यही है — क्या महज नोटिस देने से व्यवस्था सुधरेगी?
सिथरा : गैरहाजिरी की परंपरा टूटी नहीं
प्राथमिक स्कूल सिथरा में भी दो शिक्षक नदारद मिले। हाई स्कूल में परीक्षा तो चल रही थी, लेकिन निगरानी सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रही। शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षा में भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई दी।
नावापारा : दस्तखत कर फरार शिक्षक!
नावापारा की घटना तो सबसे शर्मनाक मानी जा रही है। एक शिक्षक सिर्फ उपस्थिति रजिस्टर पर दस्तखत कर स्कूल से फरार हो गया। बच्चों की पढ़ाई रामभरोसे छोड़ दी गई। शिक्षा विभाग ने यहाँ भी सिर्फ शोकॉज नोटिस तक ही खुद को सीमित रखा।
अन्य स्कूलों में भी हाल बेहाल
निरीक्षण के दौरान BEO ने मा.शा. नावापारा, कोदवारीपारा (बोजिया), बोजिया के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल, हाई स्कूल कटाईपाली “C”, और स्वामी आत्मानंद उ.हि.मा.वि. हाटी का भी दौरा किया। अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन पर सवाल उठे।
अब सवाल शिक्षकों से नहीं, शिक्षा विभाग से है…
धरमजयगढ़ जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा ही बदलाव की असली चाबी है। लेकिन जब शिक्षक ही अपनी ड्यूटी से गायब हों और विभाग सिर्फ “कागज़ी कार्रवाई” करता रहे, तो ये संकेत हैं कि लापरवाही की सड़ांध सिर्फ निचले स्तर तक नहीं, बल्कि ऊपर तक फैली हुई है।
कब तक नोटिस देकर खानापूर्ति होती रहेगी?क्या कभी किसी लापरवाह शिक्षक पर सख़्त कार्रवाई होगी?और सबसे बड़ा सवाल – धरमजयगढ़ के बच्चों को कब मिलेगी सच्ची शिक्षा?
अगर अब भी विभाग नहीं जागा, तो यह निरीक्षण भी महज़ एक और औपचारिकता बनकर रह जाएगा… और शिक्षा, एक खोखले वादे से ज़्यादा कुछ नहीं।

