रायगढ़ :- 1 अक्टूबर 2026। पण्डो जनजाति की भूमि को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान के जरिए गैर-आदिवासी के नाम कराने के मामले में कापू पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी सुखन राठिया (50) को कोरबा से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तमिलनाडु चला गया था और बाद में कोरबा में ठिकाना बनाकर रह रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया, जहां पूछताछ और विवेचना के बाद गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपी को रिमांड पर भेज दिया है।
यह कार्रवाई रायगढ़ पुलिस द्वारा फर्जीवाड़े और भूमि संबंधी मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत की गई।
फर्जी पहचान के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप
पुलिस के मुताबिक मामला थाना कापू क्षेत्र के ग्राम डुमरनारा की भूमि खसरा नंबर 409 से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि यह भूमि पूर्व में पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। वर्ष 2023-24 के राजस्व अभिलेखों की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के उक्त भूमि को सुखन पिता बजरंग, जाति रावत के नाम दर्ज किया गया।
इसके बाद 21 फरवरी 2024 को इस भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र तैयार कर इसे रायपुर निवासी संतोष देवी गुप्ता के नाम बेच दिया गया।
पुलिस जांच में कथित तौर पर यह तथ्य सामने आया कि विक्रेता के रूप में दस्तावेजों में जिस व्यक्ति को प्रस्तुत किया गया, उसका वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम, जाति कंवर है। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान फर्जी आधार कार्ड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
तत्कालीन पटवारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले की जांच के दौरान तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार उक्त भूमि की बिक्री के लिए चौहद्दी उपलब्ध कराने में पटवारी की भूमिका की जांच की गई।
इस मामले में इससे पहले तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तुस खलखो की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनके बाद पुलिस ने मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी।
गिरफ्तारी से बचने तमिलनाडु, फिर कोरबा में बनाया ठिकाना
पुलिस के मुताबिक सुखन राठिया को जब अपनी गिरफ्तारी की जानकारी हुई तो वह कापू क्षेत्र से फरार होकर पहले तमिलनाडु चला गया। बाद में पुलिस द्वारा उसकी तलाश किए जाने की जानकारी मिलने पर उसने कोरबा में अपना ठिकाना बना लिया।
पुलिस टीम को आरोपी के कोरबा में होने की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद आरोपी को रायगढ़ लाया गया और विवेचना में उसकी कथित संलिप्तता पाए जाने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
पूछताछ में ₹10 हजार मिलने की बात
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान सुखन राठिया ने अपना वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया बताया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि तत्कालीन पटवारी राकेश साय और अन्य आरोपियों द्वारा उसका नाम सुखन पिता बजरंग रावत दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यह भी बताया कि इस काम के एवज में उसे 10 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद उक्त भूमि को गैर-आदिवासी संतोष देवी गुप्ता के नाम विक्रय किया गया।
हालांकि मामले में सामने आए सभी तथ्यों की पुष्टि विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
शासकीय भूमि से जुड़े फर्जीवाड़े की भी जांच
कापू पुलिस द्वारा पण्डो जनजाति की भूमि के कथित फर्जी हस्तांतरण के साथ-साथ ग्राम पंचायत रायमेर की शासकीय भूमि से संबंधित फर्जी दस्तावेज और पट्टे तैयार कर दलालों के माध्यम से रजिस्ट्री कराने के मामले की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में अन्य संभावित आरोपियों और उनकी भूमिका की भी जांच जारी है।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
तहसीलदार उन्मेश पटेल, तहसील कार्यालय कापू की रिपोर्ट पर 7 जुलाई 2026 को थाना कापू में अपराध क्रमांक 108/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419, 420, 467, 468, 471 और 120(बी) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
जांच के दौरान विक्रेता सुखन राठिया, क्रेता संतोष देवी गुप्ता, साक्षी संतन राठिया एवं जीवन वर्धन तथा तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका की जांच की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में की गई।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की, प्रधान आरक्षक सोमेश गोस्वामी, लक्ष्मी कैवर्त, आरक्षक विभूति सिंह, कन्हैया भगत सहित पुलिस स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर जमीन की रजिस्ट्री तक की पूरी प्रक्रिया की जांच जारी है।

