खरसिया :- शिक्षक दिवस के अवसर पर खरसिया विधायक उमेश नंदकुमार पटेल ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विधानसभा क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाया। 5 सितंबर को विधायक ने अपने गृह ग्राम नंदेली, पुसौर तथा खरसिया स्थित मदनपुर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रमों में विधानसभा क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया।


कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती, भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, शहीद नंदकुमार पटेल एवं शहीद दिनेश पटेल के चित्र पर पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण कर की गई। इसके पश्चात विधायक उमेश पटेल ने उपस्थित गुरुजनों को माल्यार्पण कर माथे पर तिलक लगाया और उन्हें श्रीफल एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक ने वरिष्ठ शिक्षकों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद भी लिया।

शहीद नंदकुमार पटेल ने खरसिया से रखी थी शिक्षक सम्मान की नींव
कार्यक्रम के दौरान विधायक उमेश पटेल ने शिक्षक सम्मान समारोह से जुड़ी अपने पिता एवं पूर्व गृह मंत्री शहीद नंदकुमार पटेल की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनके बाबूजी ने करीब दो दशक पहले खरसिया विधानसभा क्षेत्र के मदनपुर स्तिथ कांग्रेस कार्यालय से शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान की जो परंपरा शुरू की थी, वह आज भी निरंतर जारी है।

उन्होंने कहा कि शहीद नंदकुमार पटेल द्वारा शुरू किए गए इस आयोजन को देखकर आज छत्तीसगढ़ के अनेक जिलों में भी शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जाने लगे हैं। यह उनके लिए गर्व की बात है कि खरसिया से शुरू हुई सम्मान की यह परंपरा व्यापक रूप ले रही है।
शहीद नंदकुमार पटेल के निधन के बाद सामने आया था बड़ा संकट
उमेश पटेल ने भावुक होते हुए बताया कि शहीद नंदकुमार पटेल के शहीद होने के बाद उसी वर्ष शिक्षक दिवस आया तो खरसिया कांग्रेस परिवार के सामने असमंजस की स्थिति थी कि वर्षों से चली आ रही शिक्षक सम्मान समारोह की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। यदि कार्यक्रम किया जाए तो उमेश पटेल से कैसे कहा जाए, इसे लेकर भी कार्यकर्ताओं के मन में संशय था।

उन्होंने बताया कि बाद में जब कार्यकर्ताओं ने उनसे कार्यक्रम को लेकर बात की तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपने बाबूजी द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को कभी रुकने नहीं देंगे। उन्होंने संकल्प लेते हुए कहा था कि जब तक जीवित रहूंगा, बाबूजी द्वारा शुरू किया गया शिक्षक सम्मान समारोह लगातार चलता रहेगा।
‘पारस पत्थर और शिक्षक दोनों बराबर’
शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विधायक उमेश पटेल ने कहा कि पारस पत्थर और शिक्षक दोनों बराबर हैं। जिस प्रकार पारस पत्थर किसी सामान्य धातु को स्पर्श कर उसे सोने में बदल देता है, उसी प्रकार एक शिक्षक जब अपने विद्यार्थी के सिर पर हाथ रखता है और उसे शिक्षा एवं संस्कार देता है, तो वही विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त कर सोने की तरह निखर जाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं। समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके अनुभव और मार्गदर्शन का समाज को लाभ मिलता रहना चाहिए।
गुरुजनों के सम्मान से बढ़ता है समाज का गौरव
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। सेवानिवृत्त शिक्षकों ने अपने सेवाकाल में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा देकर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे गुरुजनों का सम्मान नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणादायी है।
शिक्षक सम्मान समारोह के दौरान माहौल भावुक और आत्मीय रहा। विधायक उमेश पटेल द्वारा वरिष्ठ शिक्षकों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने की तस्वीरें और दृश्य कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय रहे।
कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस अवसर पर अभय महंती, नरेंद्र नेगी, नेत्रनंद पटेल, सुखदेव डनसेना, सुनील शर्मा, गोपाल शर्मा,भोग सिंह राठिया, मनोज गवेल, नवीन गुप्ता, राजा महंती, शिवा चौहान, संतोष चौहान, मसत चौहान, राजा वैष्णव, टंकेश्वर राठौर, नरेंद्र डनसेना सहित कांग्रेस के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह सम्मान समारोह शहीद नंदकुमार पटेल द्वारा शुरू की गई उस परंपरा की निरंतरता का प्रतीक बना, जिसमें गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।

