खरसिया :- खरसिया क्षेत्र के ग्राम भालूनारा से चपले रेलवे साइडिंग तक जाने वाली सड़क इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जहां सड़क कम और बड़े-बड़े गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। जर्जर सड़क और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान भालूनारा, नवागांव, पामगढ़, रजघट्टा, छोटे डूमरपाली और बड़े डूमरपाली के ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है।

भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत बदतर
ग्रामीणों के मुताबिक इस मार्ग पर अडानी रेलवे साइडिंग, भाटिया एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड तथा भाटिया रेलवे साइडिंग स्थित हैं। इन साइडिंग तक कोयला लोड ट्रेलर और अन्य भारी वाहनों की दिन-रात आवाजाही होती है। लगातार भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
बरसात के मौसम में यही गड्ढे पानी और कीचड़ से भर जाते हैं, जबकि मौसम सूखा होने पर धूल और डस्ट ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती है।

स्कूली विद्यार्थियों की राह भी मुश्किल
इस मार्ग से आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में विद्यार्थी नवागांव की ओर पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यार्थियों को जर्जर सड़क, कीचड़, धूल और तेज रफ्तार भारी वाहनों के बीच आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि सड़क की हालत जल्द नहीं सुधारी गई तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

ग्रामीणों का दो टूक—सिर्फ मरम्मत नहीं, चाहिए नई सड़क
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि अब खानापूर्ति वाली मरम्मत स्वीकार नहीं की जाएगी। उनकी मांग है कि सड़क का नए सिरे से निर्माण किया जाए और निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक नए सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा।

‘हर बार मरम्मत, फिर कुछ महीने बाद वही हाल’
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन किया जा चुका है। लेकिन धरने के बाद सड़क की केवल नाममात्र की मरम्मत कर दी जाती है। कुछ महीने बीतते ही सड़क फिर पुराने हाल में पहुंच जाती है। क्या स्थानीय जनप्रतिनिधिओं द्वारा ग्रामीणों को गुमराह किया जाता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब समस्या बार-बार सामने आ रही है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा?
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता हर घर तक पहुंचते हैं और जनता से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब ग्रामीण अपनी मूलभूत समस्या को लेकर सड़क पर बैठते हैं तो उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं दिखाई देता।
ग्रामीणों ने खरसिया विधायक उमेश नंद कुमार पटेल पर भी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान वे हर घर पहुंचते हैं, लेकिन अच्छी सड़क की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीणों से मिलने के लिए समय नहीं है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भी ग्रामीणों ने घेरा
ग्रामीणों ने प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी पर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे खरसिया विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, लेकिन विकास के मामले में रायगढ़ को प्राथमिकता दी जा रही है।
ग्रामीणों ने इसे विडंबना बताते हुए सवाल किया कि जब खरसिया के गांवों की जनता जर्जर सड़क से परेशान है, तो उनकी आवाज आखिर कब सुनी जाएगी?
अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, जवाबदेही का है
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि कई गांवों के लोगों, स्कूली विद्यार्थियों और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा प्रमुख मार्ग है। ऐसे में सड़क की लगातार अनदेखी ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि आश्वासन और अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उन्हें पक्की, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सड़क चाहिए।
ग्रामीणों का धरना जारी है और उनकी मांग है कि प्रशासन जल्द स्थिति का जायजा ले तथा नए सड़क निर्माण की प्रक्रिया पर विचार करे। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस आर-पार की लड़ाई के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधि कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।

