बिलासपुर :- लगभग तीन दशक पहले जहां खेत-खलिहान थे, वहां आज कंक्रीट की बेतरतीब बस्तियाँ और कालोनियाँ खड़ी हैं। शहर के तेजी से और अव्यवस्थित विस्तार ने प्राकृतिक जल निकासी के मार्गों को बाधित कर दिया है। इसका परिणाम हर वर्षा ऋतु में देखने को मिलता है – जलभराव, घरों में घुसता पानी और जनजीवन अस्त-व्यस्त।

विद्यानगर, विनोबा नगर, पुराना बस स्टैंड, गुरु बिहार, व्यापार विहार, तेलीपारा, कश्यप कॉलोनी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हर बार बारिश के बाद हालात गंभीर हो जाते हैं। यह समस्या कोई अचानक पैदा हुई आपदा नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे अनियोजित विकास की देन है।
पहले जहां वर्षा का पानी खेतों से होकर नालों और नदियों में पहुंचता था, आज वहीं रास्ते पक्के मकानों और दुकानों से बंद हो चुके हैं। जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई, और जो नाले बने भी, वे अधूरे या अनुपयुक्त साबित हुए। निर्माण के दौरान बहाव की दिशा और ढलान की अनदेखी करना आज बस्तियों के डूबने का कारण बन रहा है।

विकास के नाम पर बिना योजना के फैलाव का खामियाजा आज नागरिक भुगत रहे हैं। नए मकानों और कॉलोनियों के निर्माण में थोड़ी ऊँचाई देकर पानी को पड़ोसी की खाली ज़मीन की ओर छोड़ देना आम बात हो गई है, जिससे समस्या और बढ़ रही है।
नगर निगम और जिला प्रशासन को चाहिए कि नए निर्माणों की अनुमति देने से पहले पानी निकासी की योजना सुनिश्चित करें। प्राकृतिक जलमार्गों की पहचान कर उन्हें पुनर्जीवित करना और स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करना आज समय की आवश्यकता है।
अन्यथा यही अव्यवस्था कल और बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।

