रायगढ़ :- शहर की सड़कों पर “मरम्मत” का सरकारी ढोंग फिर उजागर हो गया है। कोतरा रोड थाना से लेकर ढीमरापुर चौक तक,कोसम नारा रोड, कांसीराम चौक से कबीर चौक तक और मिनी माता चौक से कलेक्ट्रेड तक हर मोड़ पर गड्ढों का साम्राज्य है। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही लाखों रुपये खर्च कर जिस पैचवर्क का ढिंढोरा पीटा था, वह बारिश में उखड़कर सड़क पर बिखर गया। सवाल साफ़ है—क्या ये मरम्मत थी या महज़ ठेकेदारों की जेबें भरने का खेल?

रात होते ही खतरा जानलेवा हो जाता है। पानी से लबालब गड्ढे दिखाई नहीं देते, दोपहिया चालक हर पल मौत से मुकाबला करते हैं। आये दिन हादसे होते रहते है , लेकिन निगम अफ़सरों और ठेकेदारों को शायद किसी और हादसे का इंतज़ार है।

स्थानीय व्यापारी और रहवासी अब खुलकर कह रहे हैं “हर कुछ महीने डामर डालना, फिर उखड़ना, ये भ्रष्टाचार की परंपरा बन गई है।” जनता की गाढ़ी कमाई से बार-बार की यह काग़ज़ी मरम्मत आखिर किसके लिए?

शासन-प्रशासन की लापरवाही अब शहर के लिए रोज़ का अभिशाप बन गई है। गुणवत्ता वाली सड़कें देने में नाकाम नगर निगम और निगरानी से नदारद ज़िला प्रशासन दोनों की चुप्पी बताती है कि जवाबदेही नाम की चीज़ सिर्फ़ फाइलों में है। रायगढ़ की जनता पूछ रही है: कब तक गड्ढों में ही दफ़्न रहेगा विकास?



