रायगढ़/धरमजयगढ़-
धरमजयगढ़ विकासखंड के कापू क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत कुम्हीचुंवा का प्राथमिक विद्यालय इन दिनों दुर्दशा की जीती-जागती तस्वीर बना हुआ है। यह स्कूल अब शिक्षा का केंद्र कम और सरकारी लापरवाही का प्रतीक अधिक नजर आता है।
विद्यालय का भवन जर्जर अवस्था में है, जहां हर समय किसी अनहोनी का खतरा मंडराता रहता है। आंगन में इतना कीचड़ है कि बच्चे रोजाना जूझते हुए कक्षा तक पहुँचते हैं। भवन में पांच कक्षाओं के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं हैं। कक्षा दो और चार के बच्चे एक ही कमरे में पढ़ते हैं, जिससे पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है।
पानी नहीं, सुविधा नहीं — सिर्फ संघर्ष
विद्यालय में एक मात्र हैंडपंप है, लेकिन वह भी खराब है। रसोई कक्ष की हालत इतनी खराब है कि खाना बनाना एक जोखिम भरा काम बन चुका है। रसोईया करमकुंवर ने बताया कि प्रतिदिन आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। फर्श जर्जर है, जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं।
मिड डे मील की हालत भी कम चिंताजनक नहीं। बच्चों ने बताया कि उन्हें हर दिन सिर्फ मसूर दाल और आलू ही दिया जाता है, जिससे पोषण और संतुलन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
शिक्षकों की बेबसी, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
विद्यालय के प्रधान पाठक संग्राम राठिया ने बताया कि वे 6 जून 2025 से पदस्थ हैं, और विद्यालय की ये स्थिति उनके आने से पहले की है। उन्होंने सरपंच और सचिव को कई बार लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई।
जब सरपंच लोकेश्वर राठिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वे अनुपलब्ध पाए गए। उनके परिजनों ने बताया कि वे किसी कार्य से बाहर हैं।
शासन की योजनाओं पर सवाल, बच्चों की जिजीविषा को सलाम
बुनियादी सुविधाओं के अभाव और सरकारी उदासीनता के बावजूद, इन मासूम बच्चों का पढ़ाई के प्रति समर्पण सराहनीय है। लेकिन सवाल यह है कि क्या शिक्षा का संघर्ष इस हाल में जारी रहना चाहिए?
ग्राम कुम्हीचुंवा का यह प्राथमिक विद्यालय अब एक ऐसा उपेक्षित द्वीप बन चुका है, जहाँ बच्चों को शिक्षा के दीपक को खुद अपनी मशाल से रोशन करना पड़ रहा है।

