सक्ती :- जिले में पुलिस की सख़्ती का असर अब सट्टा कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी खुलेआम लाखों-करोड़ों का दांव लगाने वाले सटोरिए अब पुलिस के खौफ से सक्ती छोड़ भागने को मजबूर हैं। पुलिस कप्तान की कड़ी कार्रवाई से घबराए कई सटोरियों ने अपना नेटवर्क कोरबा और रायपुर शिफ्ट कर लिया है।
पुरानी आईडी बेचकर नया खेल
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए कई सटोरियों ने अपने पुराने ग्राहकों को दूसरे गिरोहों को बेच दिया है। इस सौदेबाज़ी में 30 से 40 प्रतिशत कमीशन तय होने की चर्चा है। यानी ग्राहक भले ही सक्ती के हों, लेकिन खेल का संचालन अब बाहर से किया जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद अस्पताल भर्ती पर उठे सवाल
हाल ही में नगर से एक बड़े सटोरिए की गिरफ्तारी हुई थी। लेकिन जेल जाने से पहले ही उसे सीधे जांजगीर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। बिना स्थानीय डॉक्टर की सलाह के आरोपी को बाहर भेजना और सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम होने से इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठ रहे हैं।
कोरबा-रायपुर में नेटवर्क, लेकिन खिलाड़ी यहीं के
भले ही नेटवर्क कोरबा और रायपुर से संचालित हो रहा हो, लेकिन दांव लगाने और लगवाने वाले खिलाड़ी ज्यादातर सक्ती और आसपास के ही हैं। पुलिस लगातार इन पर निगरानी रखे हुए है और जैसे ही कोई सुराग मिलता है, कार्रवाई के लिए तैयार रहती है।
कप्तान का खौफ, चर्चा में सटोरियों की दबी जुबान
सटोरियों के बीच इन दिनों चर्चा है कि अगर कप्तान का ट्रांसफर हो गया तो सट्टे का कारोबार फिर फलने-फूलने लगेगा। लेकिन पुलिस सूत्रों का मानना है कि यह उनकी गलतफहमी है, क्योंकि जो भी अधिकारी आएगा, कानून के पालन को ही प्राथमिकता देगा। मौजूदा कप्तान की सख़्ती से सटोरियों की कमर टूट चुकी है और वे खौफ में जी रहे हैं।
“सुतूरमुर्ग वाली मानसिकता”
नगर में लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि सटोरिए इन दिनों सुतूरमुर्ग जैसे हैं, जो रेत में सिर छुपाकर सोचते हैं कि कोई देख नहीं रहा। हकीकत यह है कि पुलिस की पैनी नज़र अब भी उन पर बनी हुई है।
पुलिस की जीत, सटोरियों की हार
पिछले कुछ महीनों में हुई लगातार कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जिले में अवैध कारोबार की कोई जगह नहीं है। पुलिस कप्तान और सक्ती पुलिस ने संदेश दे दिया है कि चाहे नेटवर्क कोरबा में बैठे या रायपुर में, सक्ती पुलिस की नज़र से बचना नामुमकिन है।

