पतरापाली-बरगढ़ में आए दिन मवेशियों की सड़क दुर्घटनाएं, हाल में पांच गायों की मौत ने बढ़ाई चिंता; पिछली सरकार की गौठान योजना के तहत बने गौठान जर्जर, ग्रामीणों ने फिर से शुरू कर मवेशियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था की उठाई मांग
खरसिया :- रायगढ़-खरसिया-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग NH-49 पर ग्राम पतरापाली और बरगढ़ के आसपास खुले में घूम रहे मवेशियों की लगातार सड़क दुर्घटनाओं ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से आए दिन गायों समेत अन्य मवेशियों की मौत हो रही है। हाल में पांच गायों की सड़क दुर्घटना में मौत की घटना ने एक बार फिर शासन-प्रशासन और आम नागरिकों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर एक-दो दिन में मवेशियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। सड़क पर मृत अथवा घायल मवेशियों का दिखाई देना बेहद पीड़ादायक है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक मवेशियों के आ जाने से वाहन चालकों के लिए भी गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
गौठान योजना पर खर्च हुआ, फिर भी मवेशी सड़क पर क्यों?
इस समस्या के बीच अब ग्रामीणों ने पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई गौठान योजना के तहत बनाए गए गौठानों की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय गांवों में मवेशियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गौठान बनाए गए थे और इस व्यवस्था पर सरकारी राशि खर्च की गई थी, लेकिन वर्तमान में कई गौठान जर्जर अथवा अनुपयोगी स्थिति में पड़े हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में गौठान उपलब्ध है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा और मवेशी सड़कों पर भटककर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, तो इस व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है।
जर्जर गौठानों को फिर से उपयोगी बनाया जाए
ग्रामीणों की मांग है कि शासन-प्रशासन द्वारा क्षेत्र के सभी गौठानों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जो गौठान जर्जर हैं, उनकी आवश्यक मरम्मत कराई जाए और जो गौठान बंद पड़े हैं, उन्हें स्थानीय जरूरत के अनुसार दोबारा शुरू किया जाए।
गौठान में केवल मवेशियों को रखने की जगह बनाना पर्याप्त नहीं होगा। वहां चारा, पानी, छाया, बैठने की जगह और नियमित देखरेख की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। ऐसी व्यवस्था होने पर सड़कों पर खुले में घूमने वाले मवेशियों की संख्या कम की जा सकती है और दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
मवेशी मालिकों की जिम्मेदारी भी तय हो
ग्रामीणों ने इस समस्या का एक महत्वपूर्ण पक्ष पशुपालकों की जिम्मेदारी को भी बताया है। उनका कहना है कि जिन लोगों के मवेशी हैं, उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपने पशुओं को खुले में सड़कों पर न छोड़ें।
यदि कोई पशुपालक अपने मवेशियों को जानबूझकर खुले में छोड़ देता है और वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचकर दुर्घटना का कारण बनते हैं, तो ऐसे मामलों में नियमों के तहत जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पशुपालकों को मवेशियों की उचित देखरेख और सुरक्षित रखने के संबंध में जागरूक भी किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पशु मालिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। मवेशियों को सड़क पर छोड़ देना न केवल पशु के जीवन को खतरे में डालता है, बल्कि वाहन चालकों और अन्य राहगीरों की जान के लिए भी जोखिम पैदा करता है।
पांच गायों की मौत के बाद सरपंच ने उठाया कदम
हाल ही में पांच गायों की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद ग्राम पंचायत पतरापाली की सरपंच तीलकंवर राठिया ने मृत मवेशियों को सड़क से हटवाया, ताकि यातायात सुचारु हो सके और अन्य वाहन किसी दुर्घटना की चपेट में न आएं।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद मवेशियों को सड़क से हटाना तत्काल व्यवस्था है, स्थायी समाधान नहीं। स्थायी समाधान तभी होगा जब मवेशियों को सड़क पर आने से रोकने के लिए गांव स्तर पर सुरक्षित व्यवस्था विकसित की जाए।
NH-49 पर मवेशी और वाहन आमने-सामने—खतरा दोनों के लिए
राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से चलने वाले वाहनों के बीच अचानक मवेशियों का आ जाना बेहद खतरनाक स्थिति पैदा करता है। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है। अचानक सामने आए मवेशी को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने की आशंका रहती है।
इसलिए यह मुद्दा केवल गौवंश या पशु सुरक्षा का नहीं, बल्कि मानव जीवन और सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
शासन-प्रशासन के सामने अब ठोस व्यवस्था करने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि पतरापाली-बरगढ़ क्षेत्र में मवेशियों की लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाई जाए।
गौठानों का निरीक्षण हो, जर्जर गौठानों की मरम्मत हो, बंद गौठानों को दोबारा शुरू किया जाए, मवेशियों के लिए चारा-पानी और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था हो तथा पशुपालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।
इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग के ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जाए जहां मवेशियों की आवाजाही अधिक है, ताकि वहां आवश्यक सावधानी और निगरानी की व्यवस्था की जा सके।
अब सवाल व्यवस्था का है—बेजुबानों की जान बचाने के लिए कौन उठाएगा अगला कदम?
पतरापाली और बरगढ़ क्षेत्र में लगातार सामने आ रही मवेशियों की सड़क दुर्घटनाएं अब नजरअंदाज करने योग्य समस्या नहीं रह गई हैं। एक तरफ जर्जर पड़े गौठान हैं, दूसरी तरफ सड़क पर भटकते मवेशी और तीसरी तरफ तेज रफ्तार वाहन—इन तीनों के बीच सबसे ज्यादा नुकसान बेजुबान पशुओं को उठाना पड़ रहा है।
इसलिए जरूरत केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि दुर्घटना होने से पहले रोकथाम की व्यवस्था बनाने की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन गौठान व्यवस्था को स्थानीय जरूरत के अनुसार फिर से सक्रिय करे, पशुओं के लिए पर्याप्त चारा-पानी एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराए और पशुपालकों की जिम्मेदारी भी तय करे, तो NH-49 पर मवेशियों की दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है।
बेजुबान मवेशियों की जान बचाना केवल संवेदना का विषय नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। अब जरूरत है कि गौठान योजना से जुड़ी उपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जमीन पर जांची जाए और जहां व्यवस्था संभव हो, उसे प्रभावी रूप से पुनः उपयोग में लाया जाए।

