अगासमार और छिरपानी की महिलाओं ने सौंपा लिखित आवेदन, सितंबर-अक्टूबर का चावल, शक्कर, नमक और चना नहीं मिलने का लगाया आरोप; दो माह का खाद्यान्न दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
खरसिया :- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न को लेकर ग्राम पंचायत छोटे पण्डरमुड़ा के आश्रित ग्राम अगासमार और छिरपानी के ग्रामीणों ने गंभीर शिकायत की है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को बड़ी संख्या में महिलाओं सहित ग्रामीणों ने खरसिया खाद्य अधिकारी प्राची सिन्हा को लिखित आवेदन सौंपकर सितंबर और अक्टूबर माह का पीडीएस खाद्यान्न नहीं मिलने की शिकायत की।
ग्रामीणों के मुताबिक, छोटे पण्डरमुड़ा, छिरपानी और अगासमार के हितग्राहियों को निर्धारित खाद्यान्न सामग्री में मिलने वाला चावल, शक्कर, नमक और चना अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। दो माह से खाद्यान्न नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को आर्थिक और घरेलू स्तर पर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीडीएस खाद्यान्न पर निर्भर हैं कई परिवार
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनेक गरीब और जरूरतमंद परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलने वाले खाद्यान्न पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में लगातार दो माह तक खाद्यान्न नहीं मिलने से परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था को लेकर संकट खड़ा हो रहा है।
ग्रामीण महिलाओं ने खाद्य अधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए मांग की कि सितंबर और अक्टूबर माह का लंबित खाद्यान्न जल्द से जल्द दिलाया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं ने खाद्य विभाग से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पीडीएस सामग्री का वितरण नियमानुसार नहीं हुआ है तो पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि संबंधित शासकीय उचित मूल्य की दुकान के वितरण रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और हितग्राहियों को किए गए खाद्यान्न वितरण की जांच की जाए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पहले भी उठ चुके हैं उचित मूल्य दुकानों को लेकर सवाल
खरसिया तहसील के अन्य पंचायत क्षेत्रों से भी समय-समय पर शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण को लेकर शिकायतें सामने आ चूका है। ऐसे में छोटे पण्डरमुड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों की ताजा शिकायत के बाद खाद्य विभाग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस शिकायत पर कितनी गंभीरता से जांच करता है और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को सितंबर और अक्टूबर दोनों माह का पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

