खरसिया :- ग्राम गीधा में प्रस्तावित पावरग्रिड-।। उपकेंद्र निर्माण को लेकर ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। इस संबंध में ग्राम गीधा के समस्त प्रभावित कृषकों की ओर से खरसिया विधायक उमेश पटेल को आवेदन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम गीधा आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यहां अधिकांश ग्रामीणों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। ऐसे में यदि उपकेंद्र निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो किसानों के सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
193 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है परियोजना
आवेदन में ग्रामीणों ने बताया है कि ग्राम गीधा, छोटे मुड़पार और भैनापारा की कुल लगभग 193 एकड़ भूमि पर पावरग्रिड उपकेंद्र का निर्माण प्रस्तावित है। किसानों के अनुसार इस परियोजना से ग्राम गीधा की करीब 80 से 90 प्रतिशत भूमि प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का दावा है कि प्रभावित भूमि में बड़ी मात्रा में दोफसली और उपजाऊ कृषि भूमि शामिल है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में कृषि ही ग्रामीण परिवारों की आय और जीवन-यापन का प्रमुख साधन है। इसलिए कृषि भूमि का अधिग्रहण केवल जमीन का नुकसान नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने का विषय है।
भविष्य में टावरों से भी कृषि भूमि प्रभावित होने की चिंता
प्रभावित किसानों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पावरग्रिड उपकेंद्र के निर्माण के बाद उसके विस्तार और विद्युत लाइनों के लिए लगाए जाने वाले टावरों से भी आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे भविष्य में कृषि गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका है।
ग्राम सभा में पारित हो चुका है विरोध प्रस्ताव
ग्रामीणों के मुताबिक, इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत गीधा में ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। ग्राम सभा में प्रस्तावित पावरग्रिड-।। उपकेंद्र की स्थापना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जाने की बात आवेदन में कही गई है। ग्रामीणों ने अपने आवेदन के साथ ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव की छायाप्रति भी संलग्न की है।
‘पावरग्रिड का विरोध नहीं, उपजाऊ कृषि भूमि बचाने की मांग’
प्रभावित किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे पावरग्रिड परियोजना के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन इसके लिए ग्राम गीधा की उपजाऊ और दोफसली कृषि भूमि को समाप्त करना उचित नहीं होगा।
किसानों ने कहा कि यदि कृषि भूमि अधिग्रहित हो जाती है तो किसान अपनी जमीन से स्थायी रूप से वंचित हो सकते हैं। इसके साथ ही कृषि से जुड़े स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से परियोजना के लिए वैकल्पिक भूमि पर विचार करने की मांग की है।
विधायक से हस्तक्षेप की मांग
प्रभावित किसानों ने खरसिया विधायक उमेश पटेल से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राम गीधा की कृषि भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि ग्रामीणों की परिस्थितियों को देखते हुए भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाना जनहित और किसान हित में आवश्यक है।
आवेदन की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, खरसिया विधायक उमेश पटेल तथा रायगढ़ कलेक्टर को भी भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
किसानों की प्रमुख मांगें
ग्राम गीधा में प्रस्तावित पावरग्रिड-।। उपकेंद्र के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
दोफसली एवं उपजाऊ कृषि भूमि को परियोजना से बचाने के लिए वैकल्पिक भूमि पर विचार किया जाए।
ग्राम सभा में पारित विरोध प्रस्ताव और प्रभावित किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाए।
परियोजना से प्रभावित किसानों की आजीविका और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का समुचित आकलन किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास परियोजना जरूरी है, लेकिन इसके लिए किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और उनकी आजीविका की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए। अब किसानों की नजर शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर है कि उनकी आपत्ति पर क्या कार्रवाई की जाती है।

