खरसिया में गर्ग परिवार बहु झोलरीवाले द्वारा आयोजित विशाल श्रीमदभागवत कथा का भव्य शुभारंभ, शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
खरसिया :- अजित सिंह नगर, कन्या भवन के पास खरसिया में गर्ग परिवार बहु झोलरीवाले द्वारा आयोजित विशाल श्रीमदभागवत कथा का शुभारंभ भव्य धार्मिक वातावरण में हुआ। कथा के प्रारंभ से पूर्व विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में माताओं-बहनों सहित श्रद्धालुओं ने हर्षोल्लास के साथ सहभागिता की। शोभायात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया।


श्रीमदभागवत कथा के प्रथम दिवस कथा व्यास परम श्रद्धेय आचार्य गोस्वामी श्री मृदुल कृष्ण जी महाराज ने भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमदभागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य को मानवता की शिक्षा देता है। यह कथा हमें बताती है कि हमारा जीवन किस मार्ग पर चले, जिससे मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
मानवता से वैष्णवता और भगवत्ता की ओर ले जाती है भागवत कथा
आचार्य श्री ने कहा कि श्रीमदभागवत केवल मनुष्य को मानवता का पाठ ही नहीं पढ़ाती, बल्कि उसे मानवता के साथ वैष्णवता और भगवत्ता की शिक्षा भी देती है। भागवत कथा जीव को इन गुणों का पात्र बनाकर उसके जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करती है।

महापुराण के प्रारंभिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए उन्होंने श्री शुकदेव जी के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भागवत माहात्म्य के प्रारंभ में श्री सूत जी महाराज ने श्री शुकदेव जी की वंदना करते हुए वर्णन किया है कि श्री शुकदेव जी ने जन्म लेते ही गृह का त्याग कर वन की राह पकड़ ली और वहां जाकर भगवान की आराधना में लीन हो गए। उनकी आराधना इतनी निष्काम और गहन थी कि उन्हें भगवान और भागवत—दोनों की प्राप्ति हुई।
हृदय के अंधकार को दूर करती है भागवत कथा
कथा के दौरान आचार्य श्री ने शौनकादि ऋषियों और श्री सूत जी महाराज के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नैमिषारण्य में अठासी हजार शौनकादि ऋषियों ने श्री सूत जी महाराज से ऐसी कथा सुनाने की प्रार्थना की, जो मानव के हृदय में व्याप्त अज्ञान और अंधकार को दूर कर सके।

ऋषियों ने कहा कि मानव के हृदय में इतना अंधकार व्याप्त है, जो संसार में कहीं और देखने को नहीं मिलता। इस अंधकार को दूर करने के लिए ऐसे प्रकाश की आवश्यकता है, जिसका तेज करोड़ों सूर्यों के समान हो।
इस पर श्री सूत जी महाराज ने कहा कि आपका यह प्रश्न केवल आपके लिए नहीं, बल्कि समस्त संसार के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि वे ऐसी कथा का श्रवण कराएंगे, जिसके माध्यम से मनुष्य संसार की आसक्ति से निवृत्त होकर परमात्मा की ओर प्रवृत्त होगा।
आचार्य श्री ने कहा कि परमात्मा में प्रवृत्ति ही मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य है। श्रीमदभागवत मनुष्य को इसी लक्ष्य की ओर ले जाने वाली दिव्य कथा है।
भजन पर झूम उठे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब “बूटी हरी के नाम की, सबको पिला के पी” भजन की प्रस्तुति हुई तो श्रद्धालु भक्ति में भाव-विभोर हो उठे। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोतागण भजन की धुन पर झूमते नजर आए। पूरे कथा पंडाल में जयघोष और भक्ति की धारा बहती रही।
प्रथम दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि मनुष्य का जीवन केवल सांसारिक उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि मानवता, सदाचार, भक्ति और परमात्मा की प्राप्ति के लिए है। कथा आयोजन को लेकर क्षेत्र में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

