खैर-तेंदू की अवैध कटाई से लेकर फर्जी ट्रांजिट परमिट के जरिए हरियाणा-हिमाचल तक तस्करी का नेटवर्क बेनकाब, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
रायगढ़ :- 4 सितंबर 2026। जिले में खैर और तेंदू जैसी बेशकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई, भंडारण और अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़े एक बड़े संगठित नेटवर्क का पुलिस और वन विभाग ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने सिंडिकेट से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, मामले का एक अन्य प्रमुख आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस और वन विभाग के अनुसार, यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन क्षेत्रों के अलावा ओडिशा और मध्यप्रदेश तक सक्रिय था। आरोप है कि ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर उनसे खैर और तेंदू प्रजाति के पेड़ों की अवैध कटाई कराई जाती थी। इसके बाद लकड़ियों को रायगढ़ के जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित एक गोदाम में लाकर जमा किया जाता था। यहां लकड़ियों की छिलाई और अन्य प्रक्रिया के बाद उन्हें ट्रांसपोर्ट के माध्यम से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर खपाया जाता था।

फर्जी ट्रांजिट परमिट की आड़ में होता था अवैध कारोबार
पुलिस जांच में सामने आया है कि अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों को वैध दिखाने के लिए आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट (टीपी) का इस्तेमाल किया जाता था। वन विभाग की जांच के दौरान बरामद टीपी पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले, जिससे दस्तावेज प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुआ।
इसी संदेह के आधार पर वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर यह महज अवैध लकड़ी भंडारण का मामला न होकर एक बड़े संगठित और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा होने की जानकारी सामने आई।

2025 में हुई थी गोदाम पर बड़ी कार्रवाई
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पिछले वर्ष मई माह में सूचना मिली थी कि जूटमिल थाना क्षेत्र के जामटीकरा (गढ़उमरिया) में स्थित नरेश अग्रवाल के गोदाम को आरोपी रोहित मित्तल, निवासी अग्रसेन कॉलोनी, विकास नगर, कोतरा रोड, रायगढ़ ने किराये पर लिया था।
आरोप था कि आसपास के वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियां कटवाकर ट्रैक्टर और पिकअप वाहनों के माध्यम से इस गोदाम में अवैध रूप से जमा की जा रही थीं।
सूचना के आधार पर 5 मई 2025 को वन विभाग रायगढ़ की टीम ने गढ़उमरिया स्थित गोदाम में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक CG-15-DV-7577 में तेंदू प्रजाति के 42 नग लट्ठे, जिनकी मात्रा करीब 1.731 घन मीटर थी, बरामद किए गए।

इसके अलावा गोदाम से तेंदू एवं खैर प्रजाति के 146 नग लट्ठे, कुल 6.741 घन मीटर, जलाऊ लकड़ी के 9 चट्टे, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा भी जब्त किया गया था।
कार्रवाई के दौरान आरोपी रोहित मित्तल और उसके साथी गोदाम से फरार हो गए थे।
बरामद टीपी ने खोला बड़े नेटवर्क का राज
वन विभाग की टीम को लकड़ियों की ट्रांसपोर्टिंग के संबंध में ट्रांजिट परमिट उपलब्ध कराया गया था। जांच में उक्त परमिट पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। इसके बाद वन विभाग को परमिट के फर्जी होने का संदेह हुआ।
मामले की विस्तृत जांच के बाद रायगढ़ के डीएफओ के निर्देश पर वन क्षेत्रपाल संजय लकड़ा के माध्यम से 2 सितंबर 2026 को जूटमिल थाने में आवेदन प्रस्तुत किया गया। आवेदन के आधार पर जूटमिल थाना में अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज किया गया।

मामले में BNS की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) एवं 111, साथ ही भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42 सहपठित धारा 41 और 52 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
पुलिस ने बनाई विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। टीम ने आरोपियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच शुरू की।
जांच में प्रारंभिक तौर पर सामने आया कि रोहित मित्तल ने जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित गोदाम किराये पर लेकर अवैध रूप से लकड़ियों का भंडारण कराया। वह अपने बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर लकड़ियों की छिलाई आदि का काम कराता था। इसके बाद ट्रांसपोर्टर भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान के माध्यम से लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
पुलिस ने छापेमारी कर रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को हिरासत में लिया। पूछताछ एवं विवेचना के दौरान आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। वहीं भरत कुमार मेश्राम अभी फरार है।
गिरफ्तार आरोपी
रोहित मित्तल, पिता सुभाष मित्तल, निवासी अग्रसेन कॉलोनी, विकास नगर, कोतरा रोड, रायगढ़।
मनीष अग्रवाल, पिता राधेश्याम अग्रवाल, निवासी मकान नंबर 72/1, मुड़पार, बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़।
सलाउद्दीन खान, पिता इलाउद्दीन खान, निवासी सरसींवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़।
फरार आरोपी: भरत कुमार मेश्राम।
वन विभाग की कार्रवाई में जब्त सामग्री
गढ़उमरिया स्थित गोदाम में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस-वन विभाग की टीम ने ट्रक क्रमांक CG-15-DV-7577 से 42 नग तेंदू लट्ठे, करीब 1.731 घन मीटर लकड़ी, जबकि गोदाम से तेंदू एवं खैर प्रजाति के 146 नग लट्ठे, करीब 6.741 घन मीटर लकड़ी बरामद की थी।
इसके अलावा 9 चट्टे जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, एक वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा भी जब्त किया गया।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस और वन विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अवैध लकड़ी का यह कारोबार केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं था। आरोपियों द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों के साथ ओडिशा और मध्यप्रदेश से लकड़ियों की कटाई और तस्करी कराए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद लकड़ियों को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भेजकर अधिक कीमत पर बेचने का आरोप है।
फर्जी ट्रांजिट परमिट के जरिए अवैध लकड़ियों को वैध परिवहन का स्वरूप देने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, लकड़ी की वास्तविक सप्लाई चेन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई
पूरी कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन तथा वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम, एसडीओ तन्मय कौशिक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में थाना जूटमिल प्रभारी निरीक्षक अभिनव कांत सिंह, थाना पुसौर प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, सहायक उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह पटेल, मनमोहन बैरागी, प्रधान आरक्षक सतीश पाठक, लोमेश सिंह राजपूत, आरक्षक तरुण महिलाने और सुशील यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस के मुताबिक, मामले की विवेचना अभी जारी है और फरार आरोपी भरत कुमार मेश्राम की तलाश के साथ-साथ पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

