तिरपाल की लचर व्यवस्था से भीग रहा लाखों का धान, प्रभारी का गैर-जिम्मेदाराना जवाब: “खेत से पानी आ रहा है, हम क्या करें”
खरसिया/रायगढ़:-
अंजोरीपाली ग्राम स्थित धान संग्रहण केंद्र में इन दिनों लापरवाही की तस्वीरें खुलकर सामने आ रही हैं। बारिश के मौसम में केंद्र की अव्यवस्थित व्यवस्था के चलते लाखों रुपए मूल्य का धान भीगकर खराब हो रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि संग्रहण केंद्र पर धान की ढुलाई के बाद उसे सुरक्षित रखने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है।
नीचे से खुला तिरपाल, पानी सीधा घुस रहा धान में
केंद्र में धान के ऊपर तिरपाल जरूर डाला गया है, लेकिन वह केवल दिखावे के लिए। तिरपाल नीचे से पूरी तरह खुला हुआ है, जिससे बारिश का पानी आसानी से भीतर घुस रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण अनाज में नमी बढ़ रही है और धान सड़ने लगा है, जिससे उसकी गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि “हमने कभी भी धान को पूरी तरह ढंका हुआ नहीं देखा। तिरपाल के नीचे से धान साफ नजर आता है। इस पर कई बार ध्यान दिलाया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
केंद्र प्रभारी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
जब इस संबंध में संग्रहण केंद्र प्रभारी मनोज पटेल से सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा, “खेत से पानी आ रहा है, उसमें हम क्या कर सकते हैं। आपको जो छापना है छाप दीजिएगा।”
उनकी यह टिप्पणी न केवल किसानों की मेहनत का अपमान है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है।
बीमा के भरोसे पर लापरवाही
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अधिकारी अक्सर यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि “सभी धान पर बीमा होता है, नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करेगी।” मगर सवाल यह है कि क्या बीमा होने के नाम पर इस प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज किया जाना उचित है?
किसान बोले – ‘मेहनत से उगाया, अब लापरवाही से सड़ रहा’
किसानों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत से फसल उगाई है, लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण उनका धान अब बर्बादी के कगार पर है। यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आर्थिक नुकसान के साथ-साथ किसानों का सरकारी व्यवस्था से विश्वास भी खत्म हो जाएगा।
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
संग्रहण केंद्रों का निरीक्षण कराया जाए
तिरपाल व्यवस्था की तुरंत सुधार हो
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
भीगे हुए धान की विशेष रिपोर्टिंग कर उसका वैकल्पिक निस्तारण हो

