रायगढ़ :- 26 सितंबर 2026। ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत रायगढ़ पुलिस को करीब ₹32 लाख की ट्रांसपोर्ट धोखाधड़ी के मामले में बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा (27), निवासी सोनुमुड़ा देवारपारा, रायगढ़ ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय की अनुमति प्राप्त करने के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में आरोपी प्रकाश मिश्रा और उसके सह आरोपी दीपक शर्मा पर श्रीराम ट्रांसपोर्ट कंपनी के साथ फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर धोखाधड़ी करने का आरोप है। मामले में सह आरोपी दीपक शर्मा को पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा था। प्रकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी।
एक ही वाउचर नंबर से तैयार किए गए डुप्लीकेट बिल
मामले की शुरुआत 24 मार्च 2026 को हुई, जब श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक, रायगढ़ के संचालक कमल किशोर शाह ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे।
भुगतान प्रक्रिया के दौरान कंपनी को एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आने पर संदेह हुआ। कंपनी स्तर पर कराई गई जांच में सितंबर 2025 से लगातार कथित फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर कंपनी से भुगतान कराया जाता था। इस प्रक्रिया में अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और कंपनी से करीब ₹32 लाख की राशि धोखाधड़ीपूर्वक निकाली गई।
शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 187/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) एवं 60 के तहत विवेचना शुरू की गई।
आरटीओ जांच में सामने आई वाहनों की हकीकत
पुलिस ने विवेचना के दौरान कंपनी द्वारा प्रस्तुत बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से सत्यापन कराया। जांच में कई वाहन नंबर ऐसे पाए गए जो दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के थे।
पुलिस के अनुसार, इन वाहनों का श्रीराम ट्रांसपोर्ट अथवा माल परिवहन के कार्य से कोई संबंध नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों से पूछताछ करने पर उन्होंने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी श्रीराम ट्रांसपोर्ट के लिए कोई परिवहन कार्य नहीं किया था।
इस जांच के बाद पुलिस ने फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और कंपनी से भुगतान प्राप्त करने के आरोपों की दिशा में जांच आगे बढ़ाई।
दीपक शर्मा की गिरफ्तारी के बाद खुली फर्जीवाड़े की परतें
फरार आरोपियों की तलाश के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि सह आरोपी दीपक शर्मा पिता शंकरलाल शर्मा (32), निवासी दरोगापारा, रायगढ़ अपने मोहल्ले में देखा गया है। सूचना पर कोतवाली पुलिस टीम ने तत्काल दबिश देकर 29 जुलाई 2026 को उसे हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में दीपक शर्मा ने बताया कि वह श्रीराम ट्रांसपोर्ट में कार्यरत ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर कथित रूप से फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था और अलग-अलग वाहनों के नंबरों का इस्तेमाल कर कंपनी से भुगतान करवाता था।
पुलिस के मुताबिक, जिन लोगों के बैंक खातों में राशि भेजी जाती थी, वे कथित तौर पर अपना कमीशन काटने के बाद शेष रकम प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड तथा फोन-पे नंबरों पर वापस ट्रांसफर करते थे।
पुलिस ने बताया कि पूछताछ में दीपक शर्मा ने करीब ₹32 लाख की कथित धोखाधड़ी में से लगभग ₹15 लाख स्वयं रखने और करीब ₹16-17 लाख प्रकाश मिश्रा को दिए जाने की जानकारी दी थी।
फरार आरोपी ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण
पुलिस के अनुसार, प्रकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी। घर से फरार होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच प्रकाश मिश्रा ने अंततः न्यायालय में आत्मसमर्पण किया।
न्यायालय की अनुमति प्राप्त करने के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी को रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में प्रकाश मिश्रा ने खुद को ट्रांसपोर्टिंग कार्य से जुड़ा नहीं होना बताते हुए फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने की बात स्वीकार की है। उसने सह आरोपी दीपक शर्मा के साथ मिलकर कथित धोखाधड़ी की रकम PayTM एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से प्राप्त करने संबंधी जानकारी भी पुलिस को दी है।
बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच जारी
पुलिस अब मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, क्यूआर कोड, फोन-पे नंबर और अन्य वित्तीय माध्यमों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका के संबंध में भी विवेचना जारी है।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि कथित रूप से फर्जी भुगतान की रकम किन-किन खातों में पहुंची और उसके बाद राशि को किन माध्यमों से आगे ट्रांसफर किया गया।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अमित सिंह, उप निरीक्षक ऐनु देवांगन एवं एएसआई कोसो सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी ने कहा—आर्थिक अपराध करने वालों पर होगी कार्रवाई
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक धोखाधड़ी एवं संगठित तरीके से किए जा रहे वित्तीय अपराधों में शामिल आरोपियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

