दलदली जमीन में फंसा नगर निगम का ट्रैक्टर, मौके पर मिला निर्माण मलबा; भूमि विवाद के बीच आवेदक ने सीमांकन और यथास्थिति की मांग की
रायगढ़ :- रायगढ़ तहसील अंतर्गत खसरा नंबर 154 की भूमि को लेकर चल रहे विवाद के बीच मौके पर नगर निगम के ट्रैक्टर-ट्रॉली से निर्माण मलबा डाले जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सामने आए वीडियो में विवादित बताए जा रहे स्थल पर नगर निगम का ट्रैक्टर दिखाई दे रहा है। जमीन का हिस्सा नरम और दलदली नजर आ रहा है, जहां मलबा लाने वाला ट्रैक्टर फंसा हुआ दिखाई देता है। मौके पर निर्माण संबंधी मलबा भी पड़ा नजर आ रहा है।
मामले में भूमि से जुड़े आवेदक फत्ते पटेल गौटिया ने दावा किया है कि खसरा नंबर 154 की उक्त भूमि उनके पक्ष से संबंधित पैतृक भूमि है और इस संबंध में न्यायालयीन डिक्री भी उनके पक्ष में है। हालांकि, इन दावों तथा डिक्री की वर्तमान स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सका है। आवेदक का कहना है कि विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति में किसी तरह का बदलाव आगे की राजस्व कार्रवाई को प्रभावित कर सकता है।
मलबा डालने के बाद उठे कई सवाल
मामले को लेकर सामने आए वीडियो में ट्रैक्टर चालक से बातचीत के दौरान उसके द्वारा कथित तौर पर पार्षद के कहने पर मलबा लाने की बात कही जाती सुनाई देती है। चालक का यह कथन वीडियो में दर्ज है। हालांकि, उसने किसके निर्देश पर वाहन भेजे जाने की बात कही और वास्तव में इस संबंध में कोई अधिकृत आदेश जारी हुआ था या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
वीडियो सामने आने के बाद जब संबंधित पार्षद से इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने खसरा नंबर 154 के उक्त स्थल पर मलबा डलवाने या नगर निगम का ट्रैक्टर भेजने के लिए किसी तरह का निर्देश देने से स्पष्ट रूप से इंकार किया।
इस तरह मामले में एक ओर वीडियो में दर्ज चालक का कथन है, जबकि दूसरी ओर संबंधित पार्षद द्वारा निर्देश देने से किया गया स्पष्ट इंकार सामने आया है। दोनों बयानों के बीच यह विरोधाभास पूरे मामले की जांच की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना देता है।
आखिर किसके निर्देश पर पहुंचा निगम का ट्रैक्टर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि संबंधित पार्षद ने ट्रैक्टर भेजने या मलबा डलवाने का निर्देश नहीं दिया, तो नगर निगम का वाहन उक्त स्थल तक किसके निर्देश पर पहुंचा?
क्या मलबा डालने के लिए नगर निगम की ओर से कोई लिखित अथवा मौखिक अनुमति जारी की गई थी? यदि अनुमति दी गई थी तो उसे किस अधिकारी या विभाग ने जारी किया? ट्रैक्टर को किस कार्य के लिए रवाना किया गया था और उसके लिए जारी वाहन लॉग, ड्यूटी आदेश अथवा अन्य रिकॉर्ड में क्या उल्लेख है?
इन सवालों का जवाब नगर निगम के संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयान से ही स्पष्ट हो सकता है।
आवेदक ने सीमांकन और यथास्थिति की मांग की
भूमि विवाद के बीच मौके पर मलबा डाले जाने को लेकर आवेदक फत्ते पटेल गौटिया ने तहसीलदार के समक्ष सीमांकन कराने और भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग किए जाने की बात कही है।
आवेदक का कहना है कि जब भूमि का स्वामित्व और कब्जा संबंधी विवाद राजस्व एवं न्यायालयीन स्तर पर विचाराधीन हो, तब मौके की भौतिक स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि मलबा डालने से जमीन की वास्तविक स्थिति प्रभावित हो सकती है और भविष्य में सीमांकन अथवा अन्य राजस्व कार्रवाई के दौरान स्थिति को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है।
हालांकि, आवेदक द्वारा तहसीलदार अथवा पुलिस थाने में शिकायत किए जाने संबंधी दावे की समाचार लिखे जाने तक पावती अथवा संबंधित कार्यालय से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में आवेदक के कथन को फिलहाल दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच जरूरी
खसरा नंबर 154 की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में अब केवल मलबा डाले जाने का मामला ही नहीं, बल्कि भूमि की वर्तमान राजस्व स्थिति, स्वामित्व एवं कब्जे से संबंधित रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
ऐसे में राजस्व विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि संबंधित खसरा नंबर की वर्तमान रिकॉर्ड स्थिति क्या है। यदि भूमि को लेकर कोई न्यायालयीन आदेश या डिक्री प्रभावी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और उसका राजस्व रिकॉर्ड पर क्या प्रभाव है—यह भी जांच का विषय है।
इसके साथ ही मौके पर मलबा डालने से पहले किसी विभागीय अनुमति, कार्यादेश या अन्य प्रशासनिक आदेश जारी हुआ था या नहीं, इसकी जांच भी आवश्यक होगी।
निगम के वाहन की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में नगर निगम का वाहन मौके पर पहुंचने और मलबा डाले जाने का वीडियो सामने आने के बाद वाहन के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड भी अहम हो सकते हैं। ट्रैक्टर किस कर्मचारी या चालक के नाम पर था, उसे उस दिन किस कार्य के लिए भेजा गया था, ड्यूटी किस अधिकारी ने लगाई थी और मलबा कहां से उठाकर कहां ले जाने का निर्देश दिया गया था—इन सवालों के जवाब विभागीय रिकॉर्ड से मिल सकते हैं।
यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के स्तर से वाहन भेजे जाने का निर्देश जारी हुआ था, तो उसके दस्तावेजी आधार की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
जांच से ही सामने आएगा सच
फिलहाल उपलब्ध वीडियो में नगर निगम का ट्रैक्टर मौके पर दिखाई दे रहा है। जमीन का हिस्सा दलदली नजर आता है और निर्माण मलबा भी मौके पर पड़ा दिखाई देता है। वहीं, ट्रैक्टर चालक की बातचीत में पार्षद के निर्देश का कथन सामने आता है, जबकि संबंधित पार्षद ने ऐसे किसी निर्देश से स्पष्ट रूप से इंकार किया है।
ऐसे में किसी एक पक्ष के कथन को अंतिम सत्य मानने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। नगर निगम को अपने वाहन की ड्यूटी, संबंधित चालक के बयान और मलबा परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए, जबकि राजस्व विभाग को खसरा नंबर 154 की वर्तमान स्थिति, सीमांकन और मौके पर हुए बदलाव की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित बताए जा रहे स्थल पर मलबा किसके निर्देश पर डाला गया, नगर निगम का वाहन वहां किस आदेश के तहत पहुंचा और क्या इसके लिए कोई अधिकृत अनुमति मौजूद थी।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि खसरा नंबर 154 में नगर निगम के ट्रैक्टर से मलबा डाले जाने का वीडियो सामने आया है और मलबा डलवाने के निर्देश को लेकर चालक के कथन तथा पार्षद के इंकार के बीच विरोधाभास है। अब मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

