रायगढ़ :- कुछ अधिकारी अपने पद और प्रशासनिक फैसलों के कारण याद किए जाते हैं, तो कुछ ऐसे होते हैं जो अपने व्यवहार, संवेदनशीलता और जनसरोकार के कारण लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। रायगढ़ के पूर्व कलेक्टर हर्ष मंदर ऐसे ही अधिकारियों में शुमार हैं। अपने छोटे से प्रशासनिक कार्यकाल में जनहित और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने वाले हर्ष मंदर एक बार फिर रायगढ़ आ रहे हैं। उनके आगमन की खबर से पुराने सहयोगियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहरवासियों में खासा उत्साह है।
हर्ष मंदर का 15 सितंबर 2026 की रात रायगढ़ आगमन होगा। वे 16 सितंबर को पूरे दिन विभिन्न सामाजिक समूहों और अपने पुराने सहयोगियों से मुलाकात करेंगे। उनके इस प्रवास में औपचारिक कार्यक्रमों के बजाय जनसंवाद, पुराने रिश्तों को फिर से जीवंत करने और उन स्थानों पर पहुंचने को प्राथमिकता दी गई है, जहां उनके प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सामाजिक बदलाव की पहल हुई थी।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों से होगा खुला संवाद
16 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक साईं श्रद्धा होटल, रायगढ़ में जनसंवाद का आयोजन होगा। इस दौरान वे सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों और पूर्व साक्षरता कर्मियों से मुलाकात करेंगे।
इस संवाद में रायगढ़ में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू हुए सामाजिक अभियानों, साक्षरता आंदोलन, जनभागीदारी और वर्तमान समय के सामाजिक सरोकारों पर चर्चा होने की संभावना है। उनके पुराने सहयोगियों के लिए यह मुलाकात केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सामाजिक रिश्तों को फिर से महसूस करने का अवसर होगी।
केलो बिहार कॉलोनी से जुड़ी पुरानी यादें होंगी ताजा
दोपहर बाद हर्ष मंदर शाम 4 बजे से 5:30 बजे तक केलो बिहार कॉलोनी पहुंचेंगे। यहां वे कॉलोनी निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली समिति के सदस्यों और हितग्राहियों से मुलाकात करेंगे।
केलो बिहार कॉलोनी से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। इसलिए इस दौरान होने वाली मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद जब वे उन लोगों के बीच पहुंचेंगे, जिनके साथ उन्होंने कभी मिलकर इस पहल को आकार दिया था, तो निश्चित रूप से पुरानी यादें भी ताजा होंगी।
वृद्धाश्रम और कुष्ठ बस्ती में परिवारों से मिलेंगे
हर्ष मंदर का अगला पड़ाव वृद्धाश्रम और कुष्ठ बस्ती होगा। शाम करीब 6 बजे वे वहां रहने वाले बुजुर्गों और परिवारों से मुलाकात करेंगे।
यह वही क्षेत्र है, जहां उनके प्रयासों से वृद्धाश्रम और कुष्ठ उन्मूलन से जुड़ी पहल शुरू हुई थी। प्रशासनिक पद पर रहते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के बीच पहुंचकर उनके जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश हर्ष मंदर के कार्यकाल की उल्लेखनीय पहचान रही है।
वहां रहने वाले परिवारों से मुलाकात के दौरान वे उनका हालचाल जानेंगे और पुराने संबंधों को फिर से महसूस करेंगे। इसके बाद भोजन एवं विश्राम के बाद वे अगले दिन सुबह रायपुर के लिए रवाना होंगे।
सिर्फ 11 महीने का कार्यकाल, लेकिन प्रभाव वर्षों तक कायम
रायगढ़ में हर्ष मंदर का कलेक्टर के रूप में कार्यकाल भले ही करीब 11 महीने का रहा, लेकिन इस छोटी अवधि में उन्होंने प्रशासन को महज सरकारी व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय उसे समाज और आम लोगों से जोड़ने की कोशिश की।
उनके कार्यकाल में साक्षरता अभियान को जमीन पर उतारने की दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ। उन्होंने जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए रायगढ़ में लोक शक्ति समिति के गठन की पहल की। उनका मानना था कि किसी भी सरकारी योजना की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब आम नागरिक उसमें सक्रिय भागीदार बने।
यही सोच आगे चलकर उनके प्रशासनिक और सामाजिक कार्यों की पहचान बनी।
अधिकारों को कागज से निकालकर गांवों तक पहुंचाने की पहल
हर्ष मंदर का नाम छत्तीसगढ़ में अधिकार आधारित जनसरोकारों से भी जुड़ा रहा है। प्रशासनिक दायित्व में रहते हुए उन्होंने सूचना का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार जैसे विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने और इनके जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ में मितानिन कार्यक्रम, ग्राम सभा को मजबूत करने, ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और वन अधिकार से संबंधित कानूनों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके काम करने का तरीका पारंपरिक प्रशासनिक शैली से अलग माना जाता था। वे सरकारी योजनाओं और कानूनों को केवल फाइलों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने पर जोर देते थे।
आईएएस से सामाजिक कार्यकर्ता तक का सफर
भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए हर्ष मंदर ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी में भी सेवाएं दीं। प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा से अलग होकर सामाजिक कार्य को अपना जीवन समर्पित करने का निर्णय लिया।
वर्तमान में वे दिल्ली में बेघर और बेसहारा परिवारों तथा बेसहारा बच्चों के लिए सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं। प्रशासनिक सेवा से दूरी बनाने के बावजूद उनका जनसरोकार और समाज के कमजोर तबकों के प्रति प्रतिबद्धता लगातार बनी हुई है।
रायगढ़ से रिश्ता आज भी उतना ही मजबूत
हर्ष मंदर का रायगढ़ से रिश्ता केवल एक पूर्व कलेक्टर का अपने पुराने जिले से संबंध नहीं है। यहां उन्होंने जिन लोगों के साथ काम किया, जिन अभियानों को आगे बढ़ाया और समाज के जिन वर्गों के बीच समय बिताया, उनसे उनका भावनात्मक जुड़ाव आज भी बना हुआ है।
इसी आत्मीयता के कारण वे समय-समय पर रायगढ़ आते रहे हैं और अपने पुराने साथियों से मुलाकात करते रहे हैं। इस बार भी उनका कार्यक्रम इसी आत्मीयता को दर्शाता है—सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद, पुराने सहयोगियों से मुलाकात, केलो बिहार कॉलोनी के हितग्राहियों के बीच पहुंचना और वृद्धाश्रम तथा कुष्ठ बस्ती के परिवारों से मिलना।
एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी का अपने पुराने शहर में इस तरह लौटना रायगढ़ के उन लोगों के लिए खास मायने रखता है, जिन्होंने उनके साथ मिलकर सामाजिक बदलाव की कई पहल देखी और उनमें भागीदारी की।
उनके आगमन को लेकर रायगढ़ में उत्सुकता का माहौल है। लोगों को उम्मीद है कि इस मुलाकात में बीते दौर की यादों के साथ वर्तमान सामाजिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी सार्थक बातचीत होगी।
हर्ष मंदर के रायगढ़ प्रवास की जानकारी जन चेतना रायगढ़ के राजेश त्रिपाठी ने दी है।

