ओवरलोड भारी वाहनों ने बढ़ाई मुसीबत, सड़क पर पार्किंग से रास्ता हुआ संकरा; स्कूली बच्चों, किसानों और राहगीरों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा, ग्रामीणों ने दी चक्काजाम की चेतावनी
खरसिया :- खरसिया क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़े जामपाली से कुर्रूभाटा होते हुए जाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जहां सड़क पर सफर करना लोगों के लिए किसी जोखिम से कम नहीं है। बारिश के कारण जगह-जगह सड़क उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढों में पानी व कीचड़ जमा है। इसके चलते दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों, किसानों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब हालत के बावजूद इस मार्ग से भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है। कई वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं, जिससे पहले से जर्जर सड़क पर हादसे का खतरा और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया तो किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी।
बारिश में उखड़ी सड़क, गड्ढों और कीचड़ में बदला मार्ग
ग्रामीणों के अनुसार कुर्रूभाटा से बड़े जामपाली तक जाने वाली सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई थी। वर्ष 2012 में सड़क का चौड़ीकरण भी किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और बिंजकोट क्षेत्र से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने के बाद सड़क पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बरसात के दौरान सड़क के कई हिस्सों में खुदाई अथवा सड़क उखड़ने के बाद वहां पानी जमा होने लगा। लगातार बारिश के चलते इन स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कई जगह सड़क कीचड़ में तब्दील हो चुकी है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए इन हिस्सों से निकलना बेहद मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक कीचड़ और फिसलन के कारण कुछ वाहन चालक गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क की स्थिति सुधारने के लिए अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
इस मार्ग की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कुर्रूभाटा में सड़क के आसपास स्कूल होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन इसी रास्ते से होकर स्कूल पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर कीचड़ होने के कारण बच्चे स्कूल पहुंचते-पहुंचते कीचड़ से सन जाते हैं। वहीं, संकरे और खराब रास्ते से भारी वाहनों की आवाजाही के बीच बच्चों को सुरक्षित निकालना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक यदि किसी दोपहिया वाहन का संतुलन बिगड़ जाए या सामने से तेज रफ्तार भारी वाहन आ जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है। स्कूली वैन और अन्य छोटे वाहनों के लिए भी सड़क की वर्तमान स्थिति खतरे से खाली नहीं है।
कोयला और फ्लाईऐश से लदे भारी वाहनों ने बढ़ाया सड़क पर दबाव
ग्रामीणों के मुताबिक बिंजकोट क्षेत्र से कोयला और फ्लाईऐश से लदे भारी वाहन लगातार कुर्रूभाटा मार्ग से गुजर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें कई वाहन ओवरलोड होने के साथ तेज रफ्तार में चलते हैं।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही का सीधा असर सड़क की हालत पर पड़ रहा है। पहले से बारिश और जलभराव से कमजोर हो चुकी सड़क पर भारी वाहनों के दबाव ने स्थिति को और खराब कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क गांव के लोगों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए बनाई गई थी, लेकिन वर्तमान में इसका इस्तेमाल भारी वाहनों के आवागमन के लिए भी किया जा रहा है। इससे सड़क की उम्र और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
सड़क पर ही खड़े किए जा रहे भारी वाहन, आवागमन हुआ मुश्किल
ग्रामीणों की परेशानी केवल गड्ढों और कीचड़ तक सीमित नहीं है। पिछले एक-दो दिनों से बिंजकोट से कुर्रूभाटा तक सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की कतारें खड़े होने की बात भी सामने आ रही है।
पहले से संकरी और जर्जर सड़क पर भारी वाहनों की पार्किंग के कारण रास्ता और संकरा हो गया है। सामने से वाहन आने पर राहगीरों और छोटे वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है। ऐसे में कभी भी टक्कर या गंभीर दुर्घटना की स्थिति बन सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों को सड़क किनारे व्यवस्थित स्थान पर खड़ा करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक मार्ग को पार्किंग स्थल न बनाया जाए।
‘ग्रामीणों के लिए बनी सड़क, कंपनी के वाहनों के लिए नहीं’
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के समय कुछ किसानों और ग्रामीणों ने आवागमन की सुविधा के लिए अपनी निजी भूमि तक सड़क निर्माण के लिए उपलब्ध कराई थी। उनका कहना है कि यह सड़क ग्रामीणों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का पहले ही जरूरत से अधिक चौड़ीकरण किया जा चुका है और अब भारी वाहनों के लगातार संचालन के कारण इसकी स्थिति खराब होती जा रही है। हालत यह है कि सामान्य छोटे वाहनों से गुजरना भी कई स्थानों पर मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का इस्तेमाल भारी एवं ओवरलोड वाहनों के लिए लगातार किया जाता रहा तो जल्द ही इसकी स्थिति और खराब हो सकती है।
बारिश के मौसम में सड़क उखाड़ने पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने बारिश के मौसम में सड़क के कई हिस्सों के उखड़ने अथवा निर्माण कार्य के कारण मार्ग की स्थिति खराब होने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बरसात में सड़क की खुदाई या उसे उखाड़ने से जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ने की आशंका पहले से रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की योजना बनाते समय आम जनता की परेशानी और सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि यदि किसी हिस्से में काम जरूरी था तो वैकल्पिक आवागमन और सुरक्षा की व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी।
जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश
सड़क की दुर्दशा, भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क पर वाहनों की पार्किंग को लेकर ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की जानकारी संबंधित जिम्मेदारों को होने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क को तत्काल आवागमन योग्य बनाया जाए। गड्ढों को भरा जाए, कीचड़ और जलभराव की समस्या दूर की जाए तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए।
इसके साथ ही भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने तथा सड़क पर भारी वाहनों की पार्किंग तत्काल बंद कराने की मांग भी की गई है।
हादसा होने से पहले जागे प्रशासन
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। खराब सड़क, कीचड़, गड्ढे, तेज रफ्तार भारी वाहन और सड़क पर पार्किंग—इन सभी परिस्थितियों के बीच स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की स्थिति नहीं सुधारी गई और भारी वाहनों की आवाजाही एवं पार्किंग पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो वे आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति का जायजा ले और उच्च गुणवत्ता के साथ सड़क की मरम्मत कराकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे, ताकि आने वाले समय में ग्रामीणों को फिर ऐसी बदहाल सड़क से होकर गुजरने के लिए मजबूर न होना पड़े।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—जब सड़क पर रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है और स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से गुजरते हैं, तो किसी बड़े हादसे से पहले जिम्मेदारी कौन लेगा?

