रायगढ़ :- संजय मार्केट स्थित श्री श्याम मंदिर में श्री श्याम सरकार महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रसिद्ध कथावाचक श्री श्री भारत भूषण शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं नंद उत्सव का ऐसा भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया कि पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण करते हुए भावविभोर नजर आए।

श्रीमद्भागवत कथा के इस आयोजन में अंचल के प्रसिद्ध कथावाचक श्री भारत भूषण शास्त्री जी अपनी प्रभावशाली कथा शैली से श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं से जोड़ रहे हैं। उन्होंने वृंदावन धाम, ब्रज मंडल स्थित अत्रि निकेतन आश्रम के परम पूज्य गुरुवर श्री श्री ताराचंद जी शास्त्री जी के सानिध्य में 18 ग्रंथों का विधिवत ज्ञान प्राप्त किया है। अपनी विद्वता, सरल वाणी और प्रभावी कथा शैली के माध्यम से वे छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों में कथावाचन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
पूतना से लेकर दावानल तक का किया सजीव वर्णन
कथा के दौरान श्री शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल आगमन के बाद की विभिन्न बाल लीलाओं का अत्यंत रोचक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के माध्यम से अधर्म और अहंकार का अंत हुआ।
उन्होंने पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार पूतना छलपूर्वक नंदगांव पहुंची और विष लगे स्तन से बालकृष्ण को दुग्धपान कराने का दुष्ट प्रयास किया। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसके प्राणों का उद्धार कर उसे भी मोक्ष प्रदान किया। इसके साथ ही उन्होंने अघासुर, बकासुर, वत्सासुर तथा दावानल से संबंधित प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया।
कथावाचक की भावपूर्ण प्रस्तुति और प्रसंगों के सजीव चित्रण ने ऐसा वातावरण बना दिया मानो श्रद्धालु स्वयं द्वापर युग के गोकुल और वृंदावन में पहुंच गए हों। कथा के प्रत्येक प्रसंग के साथ पंडाल में भक्ति और उत्साह का वातावरण दिखाई दिया।
नंद उत्सव में भक्ति के साथ झूम उठे श्रद्धालु
कृष्ण लीला के पश्चात जब श्री शास्त्री जी ने नंद उत्सव का प्रसंग प्रारंभ किया तो कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह बदल गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो संजय मार्केट स्थित श्री श्याम मंदिर का पूरा पंडाल नंदगांव में परिवर्तित हो गया हो।
नंद उत्सव के प्रसंग के दौरान कथा के यजमान श्री श्याम सखा महिला मंडल के लगभग 25 जोड़ों सहित पंडाल में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने स्थानों पर खड़े होकर भक्ति में झूमने और नृत्य करने लगे। चारों ओर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने अपने बाल गोपाल के साथ नंद उत्सव की खुशी को उत्साहपूर्वक मनाया और कृष्ण की बाल लीलाओं का आनंद लिया।
पूरे पंडाल में उमंग, उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखकर ऐसा लग रहा था कि हर भक्त स्वयं नंद बाबा के घर पहुंचे उत्सव का हिस्सा बन गया हो।
अनुपस्थित भक्तों तक पहुंचाया कथा का रस
कथा के इन दिव्य प्रसंगों को एक भक्त ने अपनी लेखनी के माध्यम से संजोने का प्रयास किया, ताकि किसी कारणवश कथा में उपस्थित न हो पाने वाले भक्त भी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण और भावनात्मक रूप से रसपान कर सकें। कथा के प्रसंगों का यह लेखबद्ध प्रयास आयोजन की भक्ति भावना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की सार्थक पहल है।
आज होगा रुक्मणी विवाह और 56 भोग
श्रीमद्भागवत कथा के आगामी प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी विवाह का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके साथ ही भगवान को 56 भोग अर्पित किया जाएगा। आयोजक श्री श्याम सरकार महिला मंडल ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर कथा श्रवण एवं रुक्मणी विवाह उत्सव में सहभागी बनने का आग्रह किया है।
श्री श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भक्ति का उत्साह यह दर्शा रहा है कि भगवान श्रीकृष्ण की कथा जनमानस को आध्यात्मिकता और भक्ति से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।

