खरसिया :- मदनपुर स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहां का आई.सी.टी. लैब पूरी तरह बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है, जिसका सीधा जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन—विशेषकर प्रिंसिपल और लैब इंचार्ज—को माना जा रहा है।
शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर स्कूली बच्चों के लिए कंप्यूटर, तकनीकी संसाधन, किताबें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा मिल सके और उनका भविष्य संवर सके। लेकिन मदनपुर स्कूल में इन सुविधाओं का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।

लैब में लगे कंप्यूटर और अन्य उपकरण महीनों से धूल खा रहे हैं। कई मशीनें खराब हो चुकी हैं, जबकि कुछ का उपयोग ही नहीं किया जा रहा। नियमित देखरेख और संचालन के अभाव में पूरा आई.सी.टी. लैब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि जब जनपद उपाध्यक्ष डॉ. हितेश गवेल औपचारिक निरिक्षण करने स्कूल पहुंचे तो स्कूल में लापरवाही ही लापरवाही देखने को मिला।
स्कूल के जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति से पूरी तरह बेखबर या यूं कहें कि जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के बजाय उन्हें इन सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, जो सीधे-सीधे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही आने वाली पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा से दूर कर देगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेगा? या फिर इसी तरह सरकारी संसाधनों की बर्बादी और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा?

