रायगढ़ / तमनार :- तमनार तहसील के ग्राम पंचायत गारें में 03 अक्टूबर 2025 को प्राकृतिक संसाधनों में सामुदायिक भागीदारी और पेसा कानून के तहत ग्राम सभा के निर्णयों के महत्व को लेकर 16वां कोयला सत्याग्रह आयोजित किया गया। इस आयोजन में तमनार कोयला प्रभावित क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण महिला-पुरुष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से विधायक लैलूंगा विद्यावती सिदार, पेलमा के बंशी पटेल, हरिहर प्रसाद पटेल, राजेश मरकाम, बाबूलाल सिदार, रविशंकर सिदार, ग्राम गारें की सरपंच सविता रथ, चक्रधर राठिया (पेलमा), कन्हैई पटेल, महेश पटेल, हलधर निषाद (पाता) तथा राजेश त्रिपाठी (जनचेतना रायगढ़) उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा ग्रामसभा को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून जनजातीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए बना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका सही पालन नहीं हो रहा। कोयला खनन से प्रभावित गांवों के लोग लगातार विस्थापन, पर्यावरणीय क्षति और आजीविका संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामसभा को ही सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय मानते हुए खनन परियोजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर स्थानीय समुदाय की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।
सत्याग्रह में यह भी तय किया गया कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसात्मक और गांधीवादी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उपस्थित ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए संगठित होकर ग्रामसभा के निर्णयों को लागू करवाने की दिशा में निरंतर संघर्ष करेंगे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि कोयला प्रभावित क्षेत्रों में पेसा कानून का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा ग्रामसभा के निर्णयों को सर्वोपरि मानते हुए प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुरक्षित रखा जाए।

