मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जल संसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूरा करने पर जोर
रायपुर :- 10 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण करने और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इन योजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के साथ भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के कई जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास करना होगा।
बैठक में प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कोरिया, धमतरी, राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए बेहतर कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी कार्यप्रणाली और अनुभवों को अन्य जिलों तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।
जल संसाधन विभाग के सचिव आर. एस. टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयासों को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जनभागीदारी की ताकत के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करने का लक्ष्य है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी होनी चाहिए। जहां भी कमियां सामने आएं, उनका तत्काल निराकरण किया जाए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं।
मार्च 2028 तक जल संरचनाओं के कार्य पूरे करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की समयबद्धता पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जल संरचनाओं को मार्च 2028 तक पूर्ण करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता और दीर्घकालिक स्थायित्व पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि तैयार जल संरचनाओं का प्रभावी उपयोग हो और उनका लाभ लंबे समय तक लोगों को मिलता रहे।
हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना लक्ष्य
बैठक में मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। प्रदेश के प्रत्येक घर में पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को अब मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में मिशन की नियमित समीक्षा करें। प्रशासनिक, तकनीकी या क्रियान्वयन से जुड़ी किसी भी तरह की बाधा सामने आने पर उसका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए।
उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन में केवल पाइपलाइन और अन्य अधोसंरचना का निर्माण लक्ष्य नहीं है। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल मिलता रहे। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
पूर्ण कार्यों के भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं
मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण हो चुके कार्यों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि भुगतान में अनावश्यक देरी से कार्यों की गति प्रभावित होती है। इसलिए जिला स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के दौरान सामने आई कमियों और समस्याओं को भी गंभीरता से लेते हुए उनके तत्काल समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शेष कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए।
हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि अपने-अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों, जल उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हुए हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन और प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करना होगा तथा

