खरसिया :- नवागांव में जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से जारी ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन आखिरकार प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद स्थगित हो गया। खरसिया विधायक उमेश नन्द कुमार पटेल की मौजूदगी में खरसिया अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं दंडाधिकारी प्रवीण भगत ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि 1 अक्टूबर 2026 से नई सड़क के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।


लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित करते हुए सड़क पर वाहनों की आवाजाही की अनुमति दे दी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय-सीमा में सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे दोबारा धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं और उस स्थिति में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी सहमति के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

समझौते के तत्काल बाद शुरू हुई गड्ढों की मरम्मत
धरना समाप्त होने के तुरंत बाद प्रशासन ने जर्जर सड़क की तत्काल समस्या को देखते हुए गड्ढों को भरने का काम शुरू कराया। सड़क खुलते ही खरसिया एसडीएम, एसडीओपी और थाना प्रभारी मौके पर मौजूद रहे और बड़े-बड़े गड्ढों को पत्थरों से भरवाने का कार्य शुरू कराया गया।

इस तत्काल कार्रवाई का उद्देश्य ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को फिलहाल राहत देना है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढों की मरम्मत केवल अस्थायी राहत है, उनकी वास्तविक मांग नई और स्थायी सड़क का निर्माण है।
वर्षों से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों के अनुसार नवागांव की सड़क लंबे समय से बेहद खराब स्थिति में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने के कारण आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई वर्षों से अलग-अलग स्तर पर धरना-प्रदर्शन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

इसी समस्या को लेकर ग्रामीण इस बार लगातार पांच दिनों तक धरने पर बैठे रहे। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी के साथ-साथ क्षेत्र के लिए बेहतर सड़क की आवश्यकता को भी प्रशासन के सामने मजबूती से रखा।
विधायक की मौजूदगी में बनी सहमति
आंदोलन के दौरान खरसिया विधायक उमेश नन्द कुमार पटेल की मौजूदगी में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई। त्रिपक्षीय चर्चा के बाद प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 1 अक्टूबर 2026 से नई सड़क का निर्माण शुरू किया जाएगा।

ग्रामीणों ने इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने समाधान की दिशा में सहयोग के लिए विधायक उमेश पटेल के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
अब असली परीक्षा 1 अक्टूबर की
धरना समाप्त होने के बाद तत्काल गड्ढों की मरम्मत शुरू होना निश्चित रूप से ग्रामीणों के लिए राहत की बात है, लेकिन आंदोलन का स्थायी समाधान तभी माना जाएगा जब निर्धारित समय पर नई सड़क का निर्माण वास्तव में शुरू हो।
ग्रामीणों के सामने वर्षों से चली आ रही सड़क की समस्या अब एक लिखित आश्वासन के बाद नई उम्मीद के साथ खड़ी है। ऐसे में आगामी 1 अक्टूबर 2026 की तारीख प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

ग्रामीणों का सवाल अब यही है कि क्या इस बार तय समय-सीमा के अनुसार सड़क निर्माण जमीन पर शुरू होगा या फिर पहले की तरह आश्वासन के बाद मामला आगे खिसक जाएगा? ग्रामीणों ने फिलहाल प्रशासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन स्थगित किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो वे फिर से धरने पर बैठने के लिए स्वतंत्र होंगे।

आंदोलन का अंत नहीं, भरोसे की शुरुआत
नवागांव का पांच दिवसीय आंदोलन फिलहाल समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन इसे ग्रामीणों की समस्या का अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। आंदोलन ने प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के लिए मजबूर किया और ग्रामीणों की एकजुटता ने यह दिखाया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई स्थानीय मांग को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
अब ग्रामीणों की निगाहें 1 अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं। गड्ढों की अस्थायी मरम्मत से मिली राहत के बाद उनकी नजर नई सड़क के स्थायी निर्माण पर है। इस बार ग्रामीणों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण का काम जमीन पर शुरू होता हुआ देखना है।

