खरसिया :- नवागांव की जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। लंबे समय से सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान ग्रामीणों के आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिल गया है। खरसिया विधायक उमेश पटेल स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर जारी उनकी लड़ाई में वे पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़े हैं।
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने विधायक उमेश पटेल को नवागांव की सड़क की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क वर्षों से जर्जर हालत में है। जगह-जगह गड्ढे होने और सड़क की सतह खराब हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीण पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं।
ग्रामीणों की मांग को जायज बताते हुए विधायक ने दिया समर्थन
धरना स्थल पर पहुंचे विधायक उमेश पटेल ने ग्रामीणों की मांग को जायज बताते हुए कहा कि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ग्रामीणों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना चिंता का विषय है। विधायक ने आश्वस्त किया कि वे ग्रामीणों की आवाज को मजबूती से उठाएंगे और सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए सरकार तथा प्रशासन पर दबाव बनाएंगे।
डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर सरकार पर निशाना
इस दौरान विधायक उमेश पटेल ने भाजपा सरकार और जिला प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि खरसिया क्षेत्र में अनेक उद्योग और कंपनियां संचालित हैं, जिनसे जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि प्राप्त होती है। उनके अनुसार, इस राशि का उपयोग खरसिया क्षेत्र के विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
विधायक ने आरोप लगाया कि खरसिया के हिस्से का डीएमएफ फंड क्षेत्र के विकास के बजाय रायगढ़ जिले के अन्य इलाकों में खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि खरसिया को उसके अधिकार का डीएमएफ फंड मिलता और उसका सही तरीके से उपयोग किया जाता, तो क्षेत्र की सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कहीं बेहतर होती।
राजनीतिक भेदभाव का लगाया आरोप
उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि खरसिया विधानसभा क्षेत्र के साथ राजनीतिक दुर्भावना के चलते भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक वाले क्षेत्र के विकास को भाजपा सरकार प्राथमिकता नहीं दे रही है। विधायक के मुताबिक, यदि खरसिया में भाजपा का विधायक होता तो विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाती, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने डीएमएफ फंड के संचालन और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिला प्रशासन के माध्यम से संचालित होने वाले इस फंड का उपयोग पारदर्शी और जरूरत के आधार पर किया जाना चाहिए। खरसिया के गांवों में जब सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को आंदोलन करना पड़ रहा है, तब फंड के उपयोग की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
विधायक उमेश पटेल ने चेतावनी दी कि यदि नवागांव सड़क निर्माण को लेकर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और चक्का जाम जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी।
ग्रामीण बोले—स्पष्ट आश्वासन मिलने तक जारी रहेगा धरना
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने भी प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा अब तक उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नवागांव की जर्जर सड़क को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। विधायक के धरना स्थल पर पहुंचने और खुले तौर पर ग्रामीणों के समर्थन में आने के बाद आंदोलन को राजनीतिक बल भी मिला है। अब ग्रामीणों के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

