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“समझौता कर लो, नहीं तो जो करना है कर लो…”—मृतक के पिता का दावा; खरसिया अस्पताल मौत मामले में बढ़ा विवाद

Admin
Admin August 13, 2026 CHHATTISGARH Kharsiya RAIGARH
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7 Min Read

तामेश्वर उर्फ प्रद्युम शर्मा की मौत पर चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप, कथित पैसों के प्रलोभन और स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर सवाल—निष्पक्ष जांच की मांग तेज

खरसिया :- सिविल अस्पताल खरसिया में उपचार के दौरान तामेश्वर उर्फ प्रद्युम शर्मा की मौत का मामला अब लगातार गंभीर होता जा रहा है। मृतक के परिजन जहां चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं अब मृतक के पिता द्वारा समझौते के लिए कथित दबाव बनाए जाने और पैसों का प्रलोभन दिए जाने का दावा किए जाने से मामला और तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है।

मृतक के पिता रावेन्द्र शर्मा ने स्वास्थ्य मंत्री और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर डॉ. विक्रम राठिया, स्टाफ नर्स सुमिती लोहा सहित अन्य संबंधित डॉ. एवं स्टाफ पर उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शिकायत में उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

मृतक के पिता का दावा—“समझौते के लिए भेजा गया था”

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रावेन्द्र शर्मा के मुताबिक, 7 अगस्त को स्टाफ नर्स सुमिती लोहा उनके चाय की दुकान पर पहुंचीं। पिता का आरोप है कि बातचीत के दौरान नर्स ने उन्हें बताया कि उन्हें डॉ. विक्रम राठिया की ओर से मामले में समझौते की बात करने के लिए भेजा गया है।

मृतक के पिता का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें पैसों का प्रलोभन देकर मामला खत्म करने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी दौरान कथित तौर पर यह बात भी कही गई—

“समझौता कर लो, नहीं तो जो करना है कर लो… पूरा स्वास्थ्य विभाग हमारे साथ है।”

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों के बयान बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

“अगर पूरा विभाग साथ है तो जांच निष्पक्ष कैसे होगी?”

मृतक के पिता द्वारा लगाए गए कथित बयान ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वास्तव में परिवार को समझौते के लिए दबाव दिया गया था, तो यह पता लगाया जाना जरूरी है कि किसके निर्देश पर बातचीत की गई और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की इसमें भूमिका थी?

वहीं, यदि पिता द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं हैं, तो संबंधित पक्ष के पास अपना पक्ष रखने और आरोपों का खंडन करने का पूरा अवसर है। यही कारण है कि इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय दस्तावेजी साक्ष्य, बयान और स्वतंत्र जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो गया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

मामले में दूसरा बड़ा सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर है। मृतक के परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और एफएसएल रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

परिवार का सवाल है कि जब उनके बेटे की मौत हो चुकी है, तो मौत के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करने वाले दस्तावेज आखिर कब सामने आएंगे?

परिजनों की मांग है कि पोस्टमार्टम से संबंधित सभी दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य पारदर्शी तरीके से सामने लाए जाएं, ताकि मौत की परिस्थितियों को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

“हमें पैसे नहीं, बेटे की मौत का सच चाहिए”

मृतक के परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिकता किसी आर्थिक समझौते की नहीं, बल्कि अपने बेटे की मौत की वास्तविक वजह जानने और न्याय पाने की है।

परिजनों ने मांग की है कि मामले की जांच किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर की जाए। उपचार के दौरान क्या हुआ, किस स्तर पर निर्णय लिए गए, कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाए।

परिवार का यह भी कहना है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर और कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच से ही सामने आएगा मौत का पूरा सच

तामेश्वर उर्फ प्रद्युम शर्मा की मौत का मामला अब केवल चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप तक सीमित नहीं रह गया है। समझौते की कथित पेशकश, पैसों के प्रलोभन का दावा, स्वास्थ्य विभाग को लेकर मृतक के पिता का आरोप और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य दस्तावेजों को लेकर उठ रहे सवाल—इन सभी पहलुओं ने मामले को गंभीर बना दिया है।

अब सबसे अहम जरूरत एक ऐसी जांच की है, जिसमें मृतक के परिजनों के आरोपों के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकीय कर्मचारियों का पक्ष भी दर्ज किया जाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी, एफएसएल रिपोर्ट, उपचार संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तामेश्वर की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही जिम्मेदार थी।

अब सामने हैं ये बड़े सवाल
क्या वास्तव में मृतक के परिवार से समझौते के लिए संपर्क किया गया था?
क्या किसी तरह के आर्थिक प्रलोभन या दबाव की पेशकश की गई?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच दस्तावेज परिवार को कब उपलब्ध होंगे?
मौत के समय अस्पताल में उपचार की पूरी प्रक्रिया क्या थी?
यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल मृतक का परिवार अपने बेटे की मौत का सच और न्याय पाने के लिए अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है।

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Admin August 13, 2026
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