धरमजयगढ़ :- कहने को धरमजयगढ़ क्षेत्र अपनी प्राकृतिक संपदा और घने जंगलों के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों यहां के बोरो और संगरा इलाके अवैध कोयला कारोबार की कालिख से सने नजर आ रहे हैं। जंगलों के भीतर बेखौफ माफिया भारी मशीनों से कोयला निकाल रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते दिखाई दे रहे हैं।
हाल ही में संगरा के जंगलों में चैन माउंटेन पीसी मशीन लगाकर खुलेआम कोयला उत्खनन किया जा रहा था। जब इसकी चर्चा गांव से लेकर चौक-चौराहों तक पहुंची तो पुलिस और खनिज विभाग हरकत में तो आए, लेकिन कार्रवाई कागजों तक ही सीमित नजर आई। पुलिस ने मामले को खनिज विभाग के हवाले कर पल्ला झाड़ लिया, वहीं खनिज विभाग ने फाइल को कई दिनों तक राजस्व और वन विभाग के बीच घुमाया। अंततः मशीन तो जब्त कर ली गई, लेकिन इस अवैध कारोबार के असली संचालक अब भी पकड़ से दूर हैं।
खनिज विभाग ने बोरो क्षेत्र से करीब 54 टन कोयला जब्त कर अपनी कार्रवाई पूरी होने का दावा जरूर किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई महज एक ट्रेलर है। बोरो, संगरा, तेजपुर और लालमाटी जैसे इलाकों में आज भी सैकड़ों टन अवैध कोयला डंप पड़ा हुआ है, जिसे माफिया धीरे-धीरे ठिकाने लगाने में जुटे हैं।
कार्रवाई के डर से कुछ समय के लिए शांत हुए तस्कर अब रात के अंधेरे में फिर सक्रिय हो गए हैं। बाहरी इलाकों से बुलाए गए ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध कोयला ईंट भट्ठों तक पहुंचाया जा रहा है। 3 मार्च को पुलिस द्वारा पकड़ी गई कोयला लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली इसी अवैध नेटवर्क का प्रमाण मानी जा रही है।
हालांकि इस मामले में पुलिस ने ट्रैक्टर चालक सज्जाद मोहम्मद उर्फ जादू को पकड़कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 170/126/135(3) के तहत केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर मामले को शांत करने की कोशिश की है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कोयला तस्करी का इतना बड़ा नेटवर्क चल रहा है तो उसके असली सरगना और खरीददार आखिर कानून की पकड़ से दूर क्यों हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में जंगलों के भीतर भारी मशीनें चल रही हैं। क्या संबंधित विभागों को बाकी इलाकों में पड़े सैकड़ों टन अवैध कोयले की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं।
ट्रैक्टर चालक तो जेल पहुंच गया, लेकिन उस कोयले का असली मालिक और उसे खरीदने वाले ईंट भट्ठा संचालक अब भी बेखौफ हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि धरमजयगढ़ में चल रहा यह खेल सिर्फ कोयले की चोरी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
यदि समय रहते बोरो, संगरा, तेजपुर और लालमाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि इस पूरे खेल में माफिया और तंत्र के बीच गहरी सांठगांठ है।
थाना प्रभारी के बिगड़े बोल
मामले में जानकारी लेने के लिए थाना प्रभारी सीताराम से संपर्क किया गया तो वे भड़क उठे। उन्होंने इसे हफ्ते भर पुराना मामला बताते हुए थाना स्टाफ भगत से जानकारी लेने को कहा। वहीं भगत ने भी आवाज ऊंची होने की बात कहकर मामले में ज्यादा जानकारी देने से परहेज किया।
