खरसिया :- अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर एक बार फिर माइनिंग विभाग सवालों के घेरे में आ गया है।
आज दिनांक 09 जनवरी 2026, सुबह करीब 8.30 से 09 बजे, रायगढ़ माइनिंग विभाग के माइनिंग इंस्पेक्टर सोमेश्वर सिन्हा अपनी टीम के साथ खरसिया क्षेत्र अंतर्गत नन्दगांव पंचायत के डेराडीह अवैध रेत घाट पर पहुंचे। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के दौरान विभाग के द्वारा 9 से 10 ट्रैक्टर पकडे जाने का खबर मिला और सभी को जोबी चौकी ले जाने की भी खबर मिली।
लेकिन जब ट्रैक्टर चौकी पहुंचे तो सिर्फ 6 ट्रैक्टर ही मौजूद थे। बाकी 3–4 ट्रैक्टर रास्ते में ही “गायब” हो गए।

ड्राइवरों का सीधा आरोप – “माइनिंग वालों ने छोड़ दिया”
चौकी में मौजूद ट्रैक्टर चालकों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि 3–4 ट्रैक्टरों को माइनिंग विभाग के लोगों ने छोड़ दिया।जब इस पूरे मामले पर माइनिंग इंस्पेक्टर सोमेश्वर सिन्हा से बाइट लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “बाइट देना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
सफाई में उलझे जवाब, सवाल जस के तस
ड्राइवरों के आरोपों पर जब पुनः सवाल किया गया तो सिन्हा का कहना था कि“सभी ट्रैक्टर साथ में लाए जा रहे थे, लेकिन रास्ते में मोड़ होने के कारण 3–4 ट्रैक्टर भाग निकले।”
फोर-व्हीलर में माइनिंग टीम और ट्रैक्टर ‘भाग’ गए?
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यही है कि माइनिंग विभाग खुद फोर-व्हीलर वाहन में था, इसके बावजूद ट्रैक्टर चालक फरार कैसे हो गए?क्या यह लापरवाही है, मिलीभगत है या फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता?
कार्रवाई या सांठगांठ?
अवैध रेत खनन पर दिखावटी कार्रवाई और फिर ट्रैक्टरों का यूं गायब हो जाना, माइनिंग विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे मामले में जांच बैठाते हैं या नहीं, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह रेत में दबा दिया जाएगा।

