रायगढ़ / खरसिया :- बरगढ़ बोराई नदी पर बने दो महत्वपूर्ण पुलों की निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बरगढ़ और अटल रॉक गार्डन शिव शक्ति ढाबा के पास स्थित ये पुल शुरू से ही घटिया मटेरियल और पतले सरिए के उपयोग के कारण विवादों में रहे हैं। अब यही पुल क्षतिग्रस्त होकर दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों की माने तो दोनों पुलों में निर्माण के दौरान पतले सरिए, कमजोर सीमेंट, गिट्टी और मसाले का इस्तेमाल किया गया था। नतीजा यह है कि अब पुलों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। सड़क पर दरारें और पुल में झुकाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
पुलों की जर्जर हालत को देखते हुए बोराई नदी पुल पर मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया है, लेकिन मरम्मत में भी वही पुरानी लापरवाही देखने को मिल रही है। फिर से पतले सरिए और घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है, जो आने वाले समय में एक और दुर्घटना को आमंत्रण दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की “टेम्पररी मरम्मत” लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती, खासकर जब भारी वाहनों और ट्रेलरों का लगातार दबाव हो।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पुलों की मरम्मत की जगह उच्च गुणवत्ता के साथ नया निर्माण कराया जाए, ताकि लंबे समय के लिए सुरक्षित यातायात सुनिश्चित हो सके। साथ ही टर्निंग पॉइंट्स पर डिवाइडर और सिग्नल लाइट्स की व्यवस्था, धीमी गति के संकेतक और साफ मार्ग चिन्ह लगाए जाएं ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की नजर इस घटिया कार्य पर नहीं पड़ रही है? पुलों की क्षमता के मुकाबले कहीं अधिक भार वाले वाहन गुजर रहे हैं, जिससे संरचना लगातार कमजोर होती जा रही है।
हर छह महीने में सड़क और पुलों की नियमित जांच एवं मरम्मत की व्यवस्था अनिवार्य की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। क्षेत्र की जनता अब जवाब चाहती है — घटिया निर्माण पर आखिर कब लगेगी रोक?

