रायगढ़। जिले की आदिम जाति एवं सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों संघ ने प्रशासन को पत्र लिखकर धान खरीदी वर्ष 2023-24 में ऋण असंतुलन की समस्या को लेकर चिंता व्यक्त की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि रायगढ़ जिले की विभिन्न सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण वितरण किया गया था, लेकिन इस प्रक्रिया में 12,93,28,858.70 रुपये का ऋण असंतुलन पाया गया है।
समिति ने बताया कि धान खरीदी के दौरान किसानों से लिए गए ऋण में 50% राशि को ही समितियों में समायोजित किया गया, जबकि शेष राशि का कोई समायोजन नहीं हुआ। इससे समितियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
ऋण असंतुलन के कारण:
- ऋण माफी योजना 2018 – राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018 में लागू ऋण माफी योजना के तहत आंशिक ऋण माफ किया गया, लेकिन पूरी राशि के समायोजन में विसंगति बनी रही।
- अल्पकालिक ऋण खाते पर बकाया ब्याज – वर्ष 2018 से अब तक समितियों के ऋण खातों पर लगातार ब्याज जोड़ा जा रहा है, जिससे असंतुलन बढ़ा है।
- ब्याज अनुदान का अभाव – किसानों को दी गई ऋण सुविधा के ब्याज अनुदान की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण ऋण समायोजन में समस्या आ रही है।
- वसूली प्रक्रिया में कठिनाई – वर्ष 2013-14 से बैंक द्वारा वसूली की प्रक्रिया में देरी के कारण भी ऋण असंतुलन की स्थिति बनी हुई है।
- कर्मचारियों का वेतन संकट – समितियों को कर्मचारियों के वेतन एवं प्रबंधन खर्चों के लिए राशि नहीं मिल पा रही है, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
समिति ने मांग की है कि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और धान खरीदी में होने वाले ऋण कटौती को रोका जाए। इससे समितियों का वित्तीय संतुलन बना रहेगा और किसानों को भी लाभ मिलेगा।

