रायगढ़। रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में पांच पुलों का निर्माण ठेकेदार विशंभर दयाल अग्रवाल को सौंपा गया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते ये सभी पुल समय पर पूरे नहीं हो सके। विधानसभा में उठे प्रश्न के बाद इन अधूरे पुलों की सच्चाई सामने आई।
खरसिया के तुरेकेला और तिउर के बीच सपनई नाले पर पुल का निर्माण कार्य अधूरा है। इसे पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन ठेकेदार ने काम बंद कर दिया था, जिससे अब सेतु विभाग ने इसकी समयसीमा जून 2025 तक बढ़ा दी है। इसी तरह धरमजयगढ़ में तेंदुमुड़ी-बेहरामुड़ा के बीच कुरकुट नदी पर बन रहा पुल भी अधूरा है, जिसे जून 2025 तक पूरा करना होगा।
रासमेर-ससकोबा रोड पर मांड नदी पर बनने वाले पुल का कार्य भी रुका हुआ है और इसे पूरा करने के लिए दिसंबर 2025 तक की मोहलत दी गई है। वहीं, नरकालो-बायसी रोड पर मांड नदी के पुल का निर्माण कार्य ठप पड़ा है, जिसकी समयसीमा भी दिसंबर 2025 तक बढ़ा दी गई है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला क्षेत्र में बड़े नवापारा रोड पर किंकारी नाले पर बन रहे पुल का काम भी धीमी गति से चल रहा है और इसे जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गुणवत्ताहीन निर्माण और मजदूरों की कमी
हाल ही में हुई जांच में पाया गया कि खरसिया के तुरेकेला-तिउर पुल में दरारें आ गई हैं, जिन्हें सीमेंट से भरने का असफल प्रयास किया गया है। इसके अलावा पांचों पुलों के कार्य में महज 24 मजदूर ही लगे हुए हैं, जिससे कार्य समय पर पूरा होना असंभव है।
सेतु विभाग की ढिलाई और ठेकेदार की मनमानी के चलते ये पुल ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। सेतु विभाग द्वारा ठेकेदार को बचाने का प्रयास भी सवालों के घेरे में है।

