रायगढ़, 27 अगस्त:रायगढ़ जिले के खरसिया जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बड़े देवगांव में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। 27 अगस्त, मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन के दौरान, स्थानीय नागरिकों के एक समूह ने पंचायत सचिव के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह मामला तब प्रकाश में आया जब 20 अगस्त को ग्राम के कुछ लोगों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जिला पंचायत रायगढ़ से मुलाकात की और पंचायत सचिव पर शासन की योजनाओं के लाभ वितरण में भेदभाव करने का आरोप लगाया।
भ्रष्टाचार के आरोप और ग्राम पंचायत का विवाद
ग्राम पंचायत बड़े देवगांव पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चर्चा में है। ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर आरोप लगाया कि वह शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सही ढंग से वितरित नहीं कर रहा है। कुछ लोगों ने यहां तक आरोप लगाया कि सचिव ने व्यक्तिगत पक्षपात के चलते कुछ परिवारों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया। इसके चलते शिकायतकर्ताओं ने सचिव को हटाने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
हालांकि, इन आरोपों के पीछे के सच का एक और पहलू सामने आया है। जिन लोगों ने सचिव के खिलाफ शिकायत की है, उन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि इन शिकायतकर्ताओं को बिना किसी अधिकृत कार्य के मनरेगा योजना के तहत तालाब गहरीकरण कार्य करने के लिए लाखों रुपये का अवैध भुगतान किया गया था। इससे पहले भी उन्हें बाड़ी योजना के तहत लाखों रुपये का अवैध भुगतान किया गया था, जबकि उन्होंने कोई वास्तविक कार्य नहीं किया था। इन मामलों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इन शिकायतकर्ताओं के परिवार के सदस्य, जो रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत हैं, ने अपने पद का दुरुपयोग करके ये अवैध भुगतान सुनिश्चित किए हैं।
पंचायत सचिव के खिलाफ आरोपों के पीछे की कहानी
कथित भ्रष्टाचार के इस विवाद में पंचायत सचिव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सचिव का कहना है कि शिकायतकर्ता खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं और अब वे पंचायत के कामकाज में हस्तक्षेप करके अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन शिकायतकर्ताओं का मकसद पंचायत की छवि को खराब करना और सचिव को हटाकर अपने किसी व्यक्ति को सचिव पद पर नियुक्त करवाना है, ताकि वे अपने भ्रष्ट गतिविधियों को जारी रख सकें।
शिकायतकर्ताओं में कुछ लोगों पर पहले से ही अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। इन पर अवैध शराब की बिक्री के आरोप लगे हैं और इनके परिवार के सदस्य बार-बार इस अपराध में पकड़े जा चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन लोगों के कारण ग्राम के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं।
कलेक्टर जनदर्शन में निष्पक्ष जांच की मांग
ग्राम पंचायत बड़े देवगांव के कुछ पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने कलेक्टर जनदर्शन के दौरान एक आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने ग्राम पंचायत के सचिव के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ताओं में से कुछ ने सक्ती टुंड्री रोड निर्माण कार्य को भी रोकने का प्रयास किया था, जिससे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई थी। इसके चलते रोड निर्माण कार्य को स्थगित करना पड़ा था, जिससे ग्रामवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई
कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे जनदर्शन में दर्ज कर लिया है और सीईओ जिला पंचायत को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई का पता चल सके। यदि जांच में सचिव या कोई अन्य अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पंचायत में पारदर्शिता और न्याय की आवश्यकता
ग्राम पंचायत बड़े देवगांव में भ्रष्टाचार के आरोपों और विरोधों के इस प्रकरण ने पंचायत प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय की महत्ता को उजागर किया है। जहां एक ओर पंचायत सचिव पर शासन की योजनाओं के लाभ वितरण में भेदभाव करने के आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं पर भी अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
इस मामले की निष्पक्ष जांच से न केवल बड़े देवगांव के ग्रामीणों को न्याय मिलने की उम्मीद है, बल्कि इससे पंचायत प्रणाली में भी सुधार की संभावना है। इस प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
कलेक्टर जनदर्शन के दौरान की गई इस मांग का परिणाम किस दिशा में जाएगा, यह समय ही बताएगा। लेकिन यह निश्चित है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है और दोषियों को दंडित किया जाता है, तो यह एक मिसाल बन सकती है, जो भविष्य में पंचायत प्रणाली में सुधार का मार्ग प्रशस्त करेगी।

