अदालत में विचाराधीन केस के बीच रातों-रात चला बुलडोजर…
रायगढ़ :- जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 49 के किनारे बांजीपाली और छातामुड़ा की सीमा पर कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। तहसील न्यायालय रायगढ़ में प्रकरण क्रमांक अ-70/2025-26 के तहत जमीन का विवाद पहले से विचाराधीन था। इस मामले की आधिकारिक पेशी 24 अक्टूबर 2026 को निर्धारित थी। विधिक मर्यादा कहती है कि विचाराधीन मामले में मौके पर किसी भी तरह का निर्माण या तोड़फोड़ नहीं की जा सकती, लेकिन तारीख से ठीक दो दिन पहले 20 और 21 अक्टूबर को मौके पर भारी-भरकम पीली जेसीबी मशीनें उतार दी गईं। बिना किसी सक्षम कानूनी आदेश और बिना किसी पूर्व नोटिस के वहां पिछले तीन वर्षों से संचालित गरीब की चाय दुकान को बुलडोजर से रौंदकर जमींदोज कर दिया गया। इसके बाद 22 अक्टूबर की रात के घने अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सामग्री गिराकर युद्धस्तर पर रेडीमेड कंक्रीट की बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई, जो सीधे तौर पर न्यायपालिका की खुली अवमानना का प्रमाण है।

कहीं रिकॉर्ड में छत्तीसगढ़ शासन के नाम दर्ज खसरा 156 को निगलने की साजिश तो नहीं?….
किसान और चाय की दुकान लगाने वाले पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे अवैध निर्माण के पीछे केवल एक गरीब दुकानदार को उजाड़ने की मंशा नहीं है, बल्कि इसके भीतर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को चुपचाप दबाने का एक बड़ा षड्यंत्र छिपा हुआ है। आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड, बी-1 प्रपत्र और डिजिटल खसरा नक्शे के अनुसार ग्राम बांजीपाली स्थित खसरा नंबर 156 का कुल रकबा 0.0850 हेक्टेयर आज भी पूरी तरह छत्तीसगढ़ शासन राजस्व विभाग के नाम दर्ज है। नक्शे में यह जमीन हाईवे की फ्रंट से जुड़ी हुई है। लेकिन इस शासकीय जमीन के संबंध में न तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कोई भू-अर्जन आदेश सार्वजनिक हुआ है और न ही प्रशासन का कोई वैध दस्तावेज मौजूद है। इसके बावजूद रसूखदारों द्वारा इस सरकारी जमीन को अपनी निजी बाउंड्रीवाल के दायरे में समेटने की खुली कोशिश की जा रही है। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि किस तरह जगतपुर रायगढ़ लिखे ट्रैक्टरों से कंक्रीट के खंभे और स्लैब लाकर सरकारी सीमा पर गाड़े जा रहे हैं और स्थानीय राजस्व अमला पूरी तरह खामोश बैठा है।

एक ही खसरा नंबर दो अलग-अलग तहसीलों में दर्ज होने का फर्जीवाड़ा..
किसान ने बताया कि और राजस्व विभाग दस्तावेजी जांच तथा बाउंड्री वॉल निर्मित जमीन की सीमांकन के दौरान माप सबसे बड़ा चौंकाने वाला खुलासा खसरा नंबर 155/2 को लेकर हुआ है, जिसका कुल रकबा 0.1090 हेक्टेयर भूस्वामी पूजा अग्रवाल और नाबालिग राघव अग्रवाल के नाम दर्ज है। राजस्व नियमों के मुताबिक एक ही खसरा नंबर केवल एक ही राजस्व हल्का और एक ही तहसील के अंतर्गत होना चाहिए, लेकिन इस प्रकरण में हाईवे से जुड़े आधे फ्रंट हिस्से को छातामुड़ा हल्का तहसील पुसौर में और बाकी आधे हिस्से को बांजीपाली हल्का तहसील रायगढ़ में दिखाया जा रहा है। दो अलग-अलग तहसीलों और दो भिन्न हल्कों में एक ही खसरे का यह अजब-गजब खेल सीधे तौर पर भू-अभिलेखों के विपरीत गलत सीमांकन हुआ है। जिसके पंचनामा में किसान ने अपनी असहमति भी दर्ज की है। जो हेराफेरी का पुख्ता प्रमाण है। इस गोलमाल और सीमा विवाद की आड़ में सिर्फ सरकारी जमीन को हड़पने की तैयारी है, बल्कि बीच में स्थित खसरा 157/1 जैसे सीमावर्ती अन्य किसानों की जमीनों पर भी संकट खड़ा किया जा रहा है।
पुश्तैनी किसान फत्तेचंद पटेल की जमीन पर 12 वर्षों से गिद्ध दृष्टि..
किसान ने अपने शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि इस विवादित स्थल पर जबरन कब्जे का इतिहास काफी पुराना है। ग्राम बांजीपाली निवासी कृषक फत्तेचंद पटेल द्वारा पुलिस और प्रशासन को दी गई शिकायतों से साफ जाहिर होता है कि उनकी पैतृक भूमि खसरा नंबर 154/1ख/1, जिसका रकबा 1.85 एकड़ है, उस पर पिछले 10 से 12 वर्षों से लगातार गिद्ध दृष्टि रखी जा रही है। खसरा नंबर 155/1ख के नाम पर किसान की जमीन के निचले और गड्ढे वाले हिस्सों पर जबरन मिट्टी-मलबा पाटकर बार-बार सीमा विवाद खड़ा किया गया। पीड़ित किसान के अनुसार व्यवहार न्यायालय वर्ग-01 रायगढ़ के प्रकरण क्रमांक 88-ए/2012 में 9 अगस्त 2017 को किसान के पक्ष में फैसला और डिक्री पारित हो चुकी है, जिसकी पुष्टि जिला न्यायाधीश के द्वितीय अपर न्यायालय ने भी की थी। इसके बावजूद अदालती डिक्री को दरकिनार कर नगर निगम के संसाधनों और भारी मशीनरी के दम पर किसान की जमीन दबाने का प्रयास किया जाता रहा।
वैध करदाता की आजीविका छीनी, 100 प्रतिशत दिव्यांग बच्चे पर गहराया संकट..
जिस गुमटी को अवैध बताकर बुलडोजर से तोड़ा गया, वह पीड़ित कैलाश आचार्य द्वारा पिछले 3 वर्षों से स्थानीय किसान की सहमति से ‘जय भोले टी सेंटर’ के नाम से चलाई जा रही थी। पीड़ित के पास केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय का बाकायदा उद्यम पंजीयन प्रमाणपत्र, आयकर विभाग का पैन कार्ड, छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी का मीटर कनेक्शन और असेसमेंट वर्ष 2026-27 का नियमित आईटीआर मौजूद है, जिसमें लगभग 13.19 लाख रुपये का कारोबार दर्ज है। इसके साथ ही पीड़ित कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत मजदूर भी है। इस दुकान के उजड़ते ही एक अत्यंत हृदयविदारक मानवीय संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित का 10 वर्षीय बड़ा बेटा शत-प्रतिशत दिव्यांग है, जो न तो चल सकता है और न ही बोल पाता है। बच्चे को गंभीर और जानलेवा दौरों से बचाने के लिए हर महीने अनिवार्य रूप से 5,000 रुपये की महंगी जीवन-रक्षक दवाइयों की जरूरत होती है। सिर पर दीपावली का त्योहार, वाहन ऋण, दो दो लोन की किस्त और अब रोजी-रोटी छिन जाने से पूरा परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है। पीड़ित ने शिकायत में साफ कहा है कि जब उसने अवैध निर्माण का विरोध किया तो उसे झूठे मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
प्रशासन की खामोशी पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग..
तस्वीरों में साफ दिख रही जेसीबी मशीनें, जमीन का समतलीकरण और रातों-रात गाड़े गए सीमेंट के खंभे साफ गवाही दे रहे हैं कि रसूखदारों के आगे प्रशासनिक तंत्र किस कदर नतमस्तक है। यह पूरी घटना सवाल खड़ा करती है कि जब मामला राजस्व अदालत में लगा हुआ था, तो बिना किसी आदेश के निर्माण कार्य कराने की छूट किसने दी। क्या जिला प्रशासन तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य पर रोक लगाकर छातामुड़ा और बांजीपाली दोनों हल्कों के अधिकारियों के साथ टोटल स्टेशन मशीन के जरिए निष्पक्ष संयुक्त सीमांकन कराएगा। छत्तीसगढ़ शासन की 0.0850 हेक्टेयर जमीन को मुक्त कराने और एक असहाय दिव्यांग बच्चे के पिता की छीनी गई आजीविका को न्याय दिलाने के लिए अब पूरा क्षेत्र रायगढ़ जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई की राह देख रहा है।

