टाउन हॉल परिसर में बड़े झूले और दुकानें लगने से रास्ता बाधित, ओवरब्रिज निर्माण के बीच बढ़ी लोगों की परेशानी; संचालक का दावा—सभी अनुमति मौजूद
खरसिया:- खरसिया नगर के टाउन हॉल परिसर में इन दिनों लग रहे मीना बाजार को लेकर प्रशासनिक अनुमति और नगर पालिका की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जहां मौके पर बड़े-बड़े झूले, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मीना बाजार लगाने के लिए अब तक कोई अनुमति जारी नहीं की गई है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि टाउन हॉल परिसर के आसपास पहले से ही आवागमन की समस्या बनी हुई है। स्टेशन रोड पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य के चलते मुख्य मार्ग बंद है और सर्विस रोड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से आम नागरिकों को पहले से ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में टाउन हॉल परिसर में मीना बाजार के लिए जगह घेर लिए जाने और एक रास्ते के बाधित होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
प्रशासन ने अनुमति से किया इनकार
मीना बाजार को लेकर जब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) खरसिया प्रवीण भगत से चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन की ओर से मीना बाजार लगाने की कोई अनुमति जारी नहीं की गई है।
वहीं, नगर पालिका की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीतू अग्रवाल ने बताया कि प्रशासन और नगर पालिका की संयुक्त बैठक के बाद ही इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल नगर पालिका द्वारा मीना बाजार के लिए कोई NOC जारी नहीं की गई है।
इन अधिकारियों के बयानों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रशासनिक अनुमति और नगरपालिका की NOC जारी नहीं हुई है, तो फिर टाउन हॉल परिसर में मीना बाजार की तैयारियां किस आधार पर की जा रही हैं?
संचालक का दावा—सभी अनुमति मौजूद
दूसरी ओर मीना बाजार संचालक दीपक पटेल मौर्या का दावा है कि उन्हें आवश्यक अनुमति और NOC प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों के बयान और संचालक के दावे के बीच स्पष्ट विरोधाभास नजर आ रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि यदि संचालक के पास वास्तव में अनुमति और NOC मौजूद है, तो वह संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे? वहीं यदि अनुमति नहीं है, तो प्रशासन की जानकारी में आने के बावजूद तैयारियां कैसे आगे बढ़ रही हैं?
मामले में संबंधित अनुमति-पत्र, NOC और अन्य दस्तावेजों की जांच से ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
ओवरब्रिज निर्माण के बीच यातायात व्यवस्था पर सवाल
टाउन हॉल परिसर के आसपास पहले से ही यातायात का दबाव है। स्टेशन रोड पर ओवरब्रिज निर्माण के कारण मुख्य मार्ग प्रभावित है। सर्विस रोड की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
ऐसे समय में टाउन हॉल परिसर के एक हिस्से में झूले और व्यावसायिक दुकानें लगाए जाने से उपलब्ध रास्ता और संकरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाजार संचालित होता है तो शाम और रात के समय भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
लाखों के लेन-देन की चर्चा, जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कथित लेन-देन और सौदेबाजी की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि मीना बाजार लगवाने के नाम पर कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों को लाखों रुपये दिए जाने की चर्चा है।
इसके अलावा यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मीना बाजार संचालन की होड़ में शामिल एक अन्य ठेकेदार को कथित लेन-देन के जरिए बोली प्रक्रिया से पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक मानी जा रही है। यदि वास्तव में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन हुआ है, तो इसकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
आखिर किसकी अनुमति से शुरू हुई तैयारियां?
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जब एसडीएम के अनुसार प्रशासन ने कोई अनुमति जारी नहीं की और नगर पालिका के अनुसार NOC भी जारी नहीं हुई, तो मीना बाजार के लिए टाउन हॉल परिसर में निर्माण और दुकानें लगाने की अनुमति किसने दी?
क्या संबंधित स्थल का आवंटन हुआ है?
क्या इसके लिए कोई निविदा या अनुबंध प्रक्रिया अपनाई गई?
क्या बिजली, पानी और सुरक्षा व्यवस्था की अनुमति ली गई है?
क्या अग्निशमन और आपदा प्रबंधन से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई हैं?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या बाजार संचालक के पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिनका दावा वह कर रहा है?
इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है।
महंगी टिकट और सामान की कीमतों को लेकर भी आशंका
मीना बाजार के संचालन में झूले, बिजली, पानी, कर्मचारियों, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च होने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि संचालन में बड़ी राशि खर्च होती है तो उसकी भरपाई झूलों के टिकट, खान-पान और बाजार में बिकने वाले सामान की कीमतों के जरिए आम ग्राहकों से की जा सकती है।
हालांकि टिकट और सामान की कीमतों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक दर सामने नहीं आई है। इसलिए वास्तविक स्थिति बाजार शुरू होने और निर्धारित दरें सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
एक तरफ जिम्मेदार अधिकारी अनुमति और NOC जारी नहीं होने की बात कह रहे हैं, दूसरी तरफ मौके पर मीना बाजार की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रशासनिक अनुमति के बिना इतनी बड़ी व्यावसायिक गतिविधि कैसे शुरू हो गई?
यदि अनुमति नहीं है तो संबंधित विभागों को मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि संचालक के पास वैध अनुमति होने का दावा है तो उसे सार्वजनिक कर पूरे विवाद का पटाक्षेप किया जाना चाहिए।
फिलहाल मामला प्रशासनिक अनुमति बनाम संचालक के दावे के बीच उलझा हुआ है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और नगर पालिका इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और मीना बाजार संचालन से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविकता क्या सामने आती है।

